हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में 18 महीने के भीतर निवेश की गई रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले बहुचर्चित मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर ₹5,000-₹5,000 का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस के “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत दर्ज गंभीर आर्थिक अपराधों में त्वरित सुनवाई और प्रभावी अभियोजन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
यह मामला हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र से जुड़ा है। वर्ष 2022 में आरोपियों ने लोगों को एक आकर्षक निवेश योजना का लालच दिया था। निवेशकों से दावा किया गया कि यदि वे योजना में धन लगाएंगे तो केवल 18 महीने के भीतर उनकी राशि दोगुनी कर दी जाएगी। ऊंचे और सुनिश्चित मुनाफे के वादे पर भरोसा कर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। बाद में न तो निवेश की रकम वापस मिली और न ही वादा किया गया लाभ, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के आधार पर बहादुरगढ़ थाने में वर्ष 2022 में मुकदमा संख्या 309/2022 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की और निवेशकों से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन तथा अन्य साक्ष्यों को एकत्र किया। जांच पूरी होने के बाद 9 जनवरी 2023 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई पूरी होने पर एसीजेएम न्यायालय, हापुड़ ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों में ग्राम चांदनेर, थाना बहादुरगढ़ निवासी अशोक पुत्र रघुवीर, धर्मपाल पुत्र रघुवीर और सुषमा पत्नी धर्मपाल शामिल हैं। इनके अलावा बुलंदशहर जिले के थाना नरसैना क्षेत्र के ग्राम भड़काऊ निवासी अशोक पुत्र चन्द्रपाल तथा हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर थाना क्षेत्र के ग्राम बागड़पुर निवासी चन्द्रकिरण पुत्र रामबीर को भी अदालत ने दोषी माना।
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अदालत ने सभी दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर ₹5,000 का अर्थदंड लगाया। न्यायालय के फैसले के बाद दोषियों को नियमानुसार जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस निर्णय को आर्थिक अपराधों के मामलों में निवेशकों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने अधिक लाभ का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया था। निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें कम समय में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन योजना वास्तविक निवेश के बजाय लोगों से धन जुटाने का माध्यम बन गई। जब निवेशकों ने अपनी राशि वापस मांगी तो उन्हें अपेक्षित भुगतान नहीं मिला, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
उत्तर प्रदेश पुलिस का “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान गंभीर आपराधिक मामलों में शीघ्र और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत विवेचना की गुणवत्ता सुधारने, साक्ष्यों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत करने और अभियोजन को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार जल्द सजा दिलाई जा सके।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि कम समय में निवेश दोगुना या अत्यधिक लाभ देने वाले प्रस्ताव अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी का संकेत होते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय अनुमति और कारोबारी मॉडल की स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था बिना पर्याप्त आधार के असामान्य मुनाफे का दावा करती है तो सतर्क रहना चाहिए और संदेह होने पर तत्काल संबंधित एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए। ऐसी जागरूकता ही निवेश आधारित धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने का सबसे मजबूत माध्यम है।
