जयपुर में RGHS के तहत कथित फर्जी दस्तावेज और बिलिंग गड़बड़ी मामले में निजी अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है।

‘रेलवे अफसर बनकर ठगी’: रोड रोलर किराए पर लेकर कबाड़ी को बेचे, ₹4.29 लाख में किया सौदा

Roopa
By Roopa
5 Min Read

हमीरपुर: Hamirpur जिले में धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने खुद को रेलवे अधिकारी और ठेकेदार बताकर दो अलग-अलग लोगों से रोड रोलर किराए पर लिए और बाद में उन्हें कबाड़ी को बेचकर फरार हो गया। इस पूरे खेल में आरोपी ने ₹4.29 लाख की रकम हासिल कर ली। मामला तब खुला जब दोनों मशीनों के चालक वापस मौके पर पहुंचे और वहां न तो मशीन मिली और न ही कथित ठेकेदार।

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने बड़ी चालाकी से खुद को “मोहन मिश्रा” बताते हुए Banda के दो अलग-अलग लोगों से संपर्क किया। उसने दावा किया कि वह रेलवे से जुड़ा अधिकारी है और सुमेरपुर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य के लिए रोड रोलर की जरूरत है। विश्वास जीतने के लिए उसने आधार कार्ड दिखाया और एडवांस राशि भी दी, जिससे दोनों पक्षों को उस पर शक नहीं हुआ।

पहला मामला कालूकुआं निवासी उमेश गुप्ता से जुड़ा है। आरोपी 30 मार्च को उनके पास पहुंचा और रेलवे का काम बताकर रोड रोलर किराए पर ले गया। उसने ₹20,000 एडवांस दिए और मशीन लेकर सुमेरपुर के चंदपुरवा गांव के पास पहुंचा। वहां पहुंचने के बाद उसने चालक से कहा कि काम दो दिन बाद शुरू होगा, तब तक वह वापस चला जाए। चालक उसके कहने पर लौट आया।

इसी तरह, 31 मार्च को आरोपी ने रामबली विश्वकर्मा से भी संपर्क किया और सड़क निर्माण का हवाला देकर एक और रोड रोलर किराए पर लिया। इस बार उसने ₹10,000 एडवांस दिए और वही रणनीति अपनाते हुए चालक को दो दिन बाद आने के लिए कहकर वापस भेज दिया। दोनों ही मामलों में आरोपी ने एक जैसी योजना अपनाई—पहले भरोसा जीतना, फिर मशीन लेकर चालक को हटाना और उसके बाद मशीन को गायब कर देना।

दो दिन बाद जब दोनों चालक तय स्थान पर लौटे, तो वहां न तो रोड रोलर थे और न ही आरोपी। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि दोनों मशीनों को खराब बताकर क्रेन के जरिए कहीं और ले जाया गया था। बाद में जानकारी मिली कि इन्हें कबाड़ी को बेच दिया गया है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

चालकों ने तुरंत अपने मालिकों को सूचना दी, जिसके बाद दोनों पक्ष मौके पर पहुंचे और तलाश शुरू की। स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी और सुरागों के आधार पर पुलिस ने कस्बे की उद्योग नगरी में स्थित एक बंद पड़ी फैक्ट्री में छापा मारा, जहां से दोनों रोड रोलर बरामद कर लिए गए। बरामदगी के बाद मशीनों को पुलिस चौकी में सुरक्षित खड़ा कराया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से बनाई थी। उसने पहले दोनों पक्षों का भरोसा जीतने के लिए एडवांस दिया, जिससे लेन-देन को वैध और सुरक्षित दिखाया जा सके। इसके बाद उसने मौके का फायदा उठाकर मशीनों को हटवाया और उन्हें कबाड़ी को बेच दिया। यह तरीका दर्शाता है कि आरोपी को इस तरह के लेन-देन और स्थानीय प्रक्रियाओं की अच्छी जानकारी थी।

मामले ने यह भी उजागर किया है कि बड़े उपकरणों के किराए पर देने में उचित सत्यापन और निगरानी की कमी किस तरह भारी नुकसान का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पहचान पत्र की सत्यता, कार्यस्थल की पुष्टि और किराए के दौरान मशीन की ट्रैकिंग जैसे कदम बेहद जरूरी हैं।

फिलहाल, पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने फर्जी पहचान कैसे बनाई और क्या इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। साथ ही कबाड़ी से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

यह घटना न केवल एक अनोखी ठगी का उदाहरण है, बल्कि यह भी बताती है कि धोखेबाज अब नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article