हल्द्वानी। ऑनलाइन शॉपिंग के छोटे से रिफंड विवाद ने एक महिला के लिए बड़ा वित्तीय नुकसान खड़ा कर दिया। उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक महिला के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें मात्र ₹380 की जींस लौटाने की कोशिश के दौरान साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से ₹1 लाख रुपये निकाल लिए। ठगों ने खुद को कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर भरोसा जीता और कुछ ही मिनटों में पूरी राशि साफ कर दी।
जानकारी के अनुसार, पीलीकोठी क्षेत्र की रहने वाली महिला ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से एक जींस मंगाई थी, जिसकी कीमत ₹380 थी। डिलीवरी मिलने के बाद महिला को उत्पाद पसंद नहीं आया और उन्होंने उसे वापस करने तथा रिफंड प्राप्त करने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्होंने गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च किया, जो इस पूरे फ्रॉड की शुरुआत साबित हुआ।
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गूगल सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर कॉल करने के बाद कुछ ही देर में महिला के पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को संबंधित कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बताया और रिफंड प्रक्रिया पूरी करने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान आरोपी ने महिला से बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारी धीरे-धीरे हासिल कर ली।
पीड़िता के अनुसार यह बातचीत लगभग 17 मिनट तक चली, जिसमें ठग ने बेहद प्रोफेशनल अंदाज में रिफंड प्रोसेसिंग के नाम पर विभिन्न स्टेप्स समझाए। इसी दौरान उसने महिला से गूगल पे से जुड़े विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने को कहा। जैसे ही यह जानकारी साझा की गई, कुछ ही समय में महिला के बैंक खाते से ₹1 लाख रुपये निकाल लिए गए।
घटना का एहसास होने पर महिला ने तुरंत बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मामले की शिकायत मुखानी कोतवाली में दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार साइबर टीम को जांच सौंप दी गई है और ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा संबंधित डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में साइबर ठग अक्सर कस्टमर केयर या डिलीवरी एजेंट बनकर लोगों से संपर्क करते हैं और उन्हें रिफंड, रिटर्न या शिकायत निवारण के नाम पर बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार जानकारी मिल जाने के बाद वे तुरंत खाते से रकम ट्रांसफर कर लेते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में सबसे बड़ा हथियार भरोसा और जल्दबाजी होता है। पीड़ित व्यक्ति अक्सर छोटे रिफंड या शिकायत को जल्दी निपटाने के चक्कर में बिना सत्यापन किए जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कंपनी का आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही प्राप्त किया जाना चाहिए। गूगल सर्च या अनजान स्रोतों से मिले नंबरों पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। साथ ही किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल या यूपीआई पिन जैसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन रिफंड, ऑफर या शिकायत के मामले में सतर्क रहें और किसी भी अनजान कॉलर को व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी न दें। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
फिलहाल पुलिस कॉल करने वाले नंबर और ट्रांजेक्शन से जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है। उम्मीद है कि डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
