नई दिल्ली/टेक्सास: अमेरिकी H-1B वीज़ा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने प्रवासी भारतीयों और इमिग्रेशन नीति पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। ब्रिटिश-अमेरिकी अभिनेता Matthew Marsden के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मुद्दा सुर्खियों में आया, जिसमें उन्होंने टेक्सास में कथित H-1B वीज़ा फ्रॉड को लेकर भारतीय समुदाय पर टिप्पणी की।
अभिनेता ने दावा किया कि उनकी टिप्पणी के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिलीं। हालांकि, उन्होंने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी विशेष नस्ल या राष्ट्रीयता को निशाना बनाना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसी तरह का मामला ब्रिटेन के लोगों से जुड़ा होता, तो भी वह उसी तरह प्रतिक्रिया देते।
पूरा विवाद 4 अप्रैल को किए गए एक पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने टेक्सास के एक स्टोर में अपने अनुभव का जिक्र करते हुए लिखा कि वहां मौजूद अधिकांश परिवार भारतीय थे और कोई अंग्रेज़ी में बात नहीं कर रहा था। उन्होंने इसे H-1B वीज़ा के दुरुपयोग से जोड़ते हुए कहा कि इससे स्थानीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूज़र्स और एक्टिविस्ट्स ने इसे ‘बिगॉट्री’ करार दिया और कहा कि परिवारों के बीच अपनी मातृभाषा में बातचीत करना सामान्य बात है, इसे वीज़ा फ्रॉड से जोड़ना गलत है। सामाजिक कार्यकर्ता Indu Viswanathan ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चों का अपनी भाषा में बात करना किसी भी तरह के धोखाधड़ी का सबूत नहीं हो सकता।
हालांकि, कुछ लोगों ने अभिनेता की चिंता का समर्थन भी किया और H-1B वीज़ा सिस्टम में संभावित खामियों की जांच की मांग उठाई। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में इमिग्रेशन नीति और विदेशी कर्मचारियों की भूमिका पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस पहले से जारी है।
क्या है H-1B वीज़ा प्रोग्राम?
H-1B वीज़ा प्रोग्राम की शुरुआत 1990 में हुई थी, जिसका उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देना है। हर साल लगभग 85,000 नए वीज़ा जारी किए जाते हैं, हालांकि यह सीमा केवल नए आवेदकों पर लागू होती है। बड़ी संख्या में पेशेवर पहले से इस वीज़ा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं।
डेटा के अनुसार, H-1B वीज़ा के तहत स्वीकृत आवेदनों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। टेक्सास का डलास-फोर्ट वर्थ क्षेत्र इस मामले में प्रमुख केंद्रों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में तकनीकी और इंजीनियरिंग से जुड़े कर्मचारी कार्यरत हैं।
टेक्सास में पहले भी उठे ऐसे मुद्दे
इससे पहले फरवरी में टेक्सास के फ्रिस्को सिटी काउंसिल की बैठक में भी इसी तरह के आरोप और टिप्पणियाँ सामने आई थीं, जहां कुछ वक्ताओं ने भारतीय समुदाय को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं। हालांकि, स्थानीय निवासियों ने इन दावों का विरोध किया और इसे बाहरी लोगों द्वारा फैलाया गया एजेंडा बताया।
फ्रिस्को के मेयर Jeff Cheney ने भी स्पष्ट किया कि इस तरह के बयान अधिकांश नागरिकों की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा कि शहर में विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा मजबूत है।
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नीतिगत बदलाव और बढ़ती सख्ती
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी प्रशासन ने H-1B वीज़ा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। Donald Trump के नेतृत्व में सरकार ने नए आवेदनों पर $100,000 (लगभग ₹83 लाख) तक की फीस लगाने जैसे कदम उठाए हैं। इसके अलावा वेतन मानकों को 21% से 33% तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो सकता है।
वहीं, टेक्सास के गवर्नर ने राज्य की यूनिवर्सिटीज़ और एजेंसियों में H-1B भर्ती पर अस्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन गया है।
भारतीय समुदाय पर असर
अमेरिका में भारतीय मूल की आबादी तेजी से बढ़ रही है और यह अब वहां का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय बन चुकी है। ऐसे में इस तरह के विवाद न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं, बल्कि भारतीय पेशेवरों के लिए भी चुनौतियाँ पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि H-1B वीज़ा सिस्टम में पारदर्शिता और सख्त निगरानी जरूरी है, लेकिन किसी भी समुदाय को बिना ठोस सबूत के निशाना बनाना स्थिति को और जटिल बना सकता है।
यह मामला दिखाता है कि कैसे एक सोशल मीडिया पोस्ट बड़े स्तर पर बहस और तनाव का कारण बन सकता है। फिलहाल, यह विवाद थमने के बजाय और गहराता दिख रहा है, जिसमें इमिग्रेशन, पहचान और सामाजिक स्वीकार्यता जैसे कई संवेदनशील मुद्दे जुड़े हुए हैं।
