ग्वालियर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुराने नोटों के बदले ₹62 लाख दिलाने का झांसा देकर एक सरकारी कर्मचारी से ₹79 हजार की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित लोकेंद्र सिंह किरार, जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग में ड्राइवर हैं, इंस्टाग्राम पर पुराने नोट खरीदने से जुड़ी एक रील देखकर ठगों के संपर्क में आए। आरोपियों ने खुद को पुरानी मुद्रा खरीदने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताकर अलग-अलग शुल्क के नाम पर कई किश्तों में पैसे वसूल लिए।
शिकायत के अनुसार, 11 जुलाई को इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल करते समय पीड़ित ने एक वीडियो देखा, जिसमें ट्रैक्टर छपे ₹5 के पुराने नोट और सिक्का छपे ₹1 के पुराने नोट के बदले लाखों रुपये देने का दावा किया गया था। वीडियो में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद आरोपियों ने उनसे पुराने नोटों की तस्वीरें व्हाट्सऐप पर भेजने को कहा।
कुछ देर बाद आरोपियों ने संदेश भेजकर दावा किया कि उनके पास मौजूद तीन ₹5 के पुराने नोट और एक ₹1 के पुराने नोट की कीमत ₹62 लाख है। इसके बाद उन्होंने भुगतान जारी करने से पहले प्रोसेसिंग फीस जमा कराने की बात कही। पीड़ित ने बताए गए क्यूआर कोड पर ₹550 ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद ठगों ने भरोसा कायम रखने के लिए नोटों की गड्डियां गिनने और पार्सल पैक करने के वीडियो भेजे। फिर उन्होंने भुगतान रिलीज करने के लिए जीएसटी कार्ड बनवाने का बहाना बनाकर ₹10,300 जमा कराए। बाद में प्रक्रिया रुकने का हवाला देते हुए ₹14,800 और मांगे गए, जिन्हें भी पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन में भेज दिया।
आरोपियों ने इसके बाद ₹29,999 की अतिरिक्त मांग की और रकम मिलने के बाद दावा किया कि पार्सल एयरपोर्ट से बाहर आ गया है, लेकिन गेट पास बनवाने के लिए ₹18,200 और देने होंगे। भरोसे में आ चुके पीड़ित ने यह रकम भी ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी।
शाम को आरोपियों ने एक और कॉल कर कहा कि उन्हें साइबर क्राइम टीम ने पकड़ लिया है और मामला सुलझाने के लिए तुरंत और पैसे भेजने होंगे, अन्यथा सभी जेल चले जाएंगे। इस पर पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, क्यूआर कोड और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण कर रही हैं ताकि गिरोह तक पहुंचा जा सके।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पुराने नोट, दुर्लभ सिक्के या अन्य वस्तुओं के बदले असामान्य रूप से बड़ी रकम देने के दावे अधिकांश मामलों में धोखाधड़ी साबित होते हैं। ठग पहले छोटे भुगतान के जरिए भरोसा जीतते हैं और फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, बीमा, पार्सल, गेट पास या अन्य काल्पनिक शुल्क के नाम पर लगातार पैसे मांगते रहते हैं।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, ऐसे मामलों में किसी भी ऑनलाइन विज्ञापन या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु के बदले बाजार मूल्य से कई गुना अधिक रकम देने का दावा करता है और अग्रिम भुगतान मांगता है, तो उसे संभावित धोखाधड़ी मानकर सतर्क रहना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे ऑफर या विज्ञापनों के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार का अग्रिम भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की विश्वसनीयता की जांच करें। यदि इस तरह की ठगी का सामना हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन **1930** पर कॉल करें या **cybercrime.gov.in** पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि रोकने की कार्रवाई की जा सके।
