गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में विदेश भेजने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक कथित वीजा धोखाधड़ी गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर एक व्यक्ति को स्लोवाकिया भेजने का झांसा दिया और फर्जी वीजा तथा कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उससे ₹6 लाख की ठगी की। पुलिस के अनुसार पीड़ित को वीडियो कॉल पर कथित तौर पर नकली वीजा दिखाकर विश्वास में लिया गया, लेकिन पूरी रकम लेने के बाद भी उसे विदेश नहीं भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक इस मामले की शिकायत डीएलएफ सेक्टर-29 थाना क्षेत्र में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि दीपक नामक व्यक्ति और उसके सहयोगी शैलेश ने उसे बेहतर रोजगार और भविष्य का सपना दिखाते हुए स्लोवाकिया भेजने का प्रस्ताव दिया। आरोपियों ने दावा किया कि वे कम समय में वीजा और यात्रा की सभी औपचारिकताएं पूरी कर देंगे तथा विदेश में नौकरी भी उपलब्ध कराएंगे।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले वीजा और यात्रा संबंधी प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर ₹50,000 लिए। इसके बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी वीजा और अन्य जाली दस्तावेज दिखाए, जिससे शिकायतकर्ता को विश्वास हो गया कि उसका वीजा तैयार हो चुका है। इसी विश्वास के आधार पर आरोपियों ने अलग-अलग किस्तों में उससे कुल ₹6 लाख वसूल लिए। हालांकि रकम लेने के बाद भी न तो वीजा मिला और न ही विदेश भेजने की कोई व्यवस्था की गई। जब शिकायतकर्ता ने लगातार संपर्क किया तो आरोपी बहाने बनाकर समय टालते रहे।
मामले की जांच के दौरान गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा, सेक्टर-31 की टीम ने कार्रवाई करते हुए रविवार को मुख्य आरोपी दीपक कुमार (39) को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी रेवाड़ी जिले के रतनथल गांव का निवासी है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला कि दीपक अपने सहयोगी शैलेश के साथ मिलकर विदेश भेजने के नाम पर लोगों से ठगी करता था।
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पुलिस ने बताया कि इस मामले में सह-आरोपी शैलेश को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उसकी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से ₹2 लाख बरामद किए थे। अब दीपक की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह विदेश भेजने का झांसा देकर ठगा है और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच अधिकारी आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित फर्जी वीजा और अन्य दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए तथा क्या इस धोखाधड़ी में किसी ट्रैवल एजेंसी, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति या अन्य बिचौलियों की भी भूमिका रही है। यदि जांच में अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि विदेश भेजने के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी वीजा, नकली ऑफर लेटर, जाली टिकट और कूटरचित यात्रा दस्तावेजों का सहारा लेते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ितों का विश्वास जीतकर उनसे बड़ी रकम वसूल ली जाती है। उन्होंने सलाह दी कि विदेश में नौकरी या वीजा दिलाने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को भुगतान करने से पहले उसके लाइसेंस, पंजीकरण, दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड का सत्यापन अवश्य करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली, धन के प्रवाह तथा संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
