गुरुग्राम: शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर गुरुग्राम के एक व्यक्ति से ₹3.26 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने राजस्थान के जयपुर निवासी 32 वर्षीय मालीराम मीणा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मालीराम ने अपनी फर्म का बैंक खाता ₹1.40 लाख में साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इसी खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया गया। पुलिस ने आरोपी को मंगलवार को जयपुर से गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
मामले की शुरुआत WhatsApp के जरिए हुई। शिकायतकर्ता से कथित साइबर ठगों ने संपर्क किया और उसे शेयर बाजार में निवेश करने पर सामान्य से कहीं अधिक मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया। शुरुआती बातचीत के बाद शिकायतकर्ता को एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में निवेश से जुड़े संदेश और मुनाफे के दावे दिखाकर उसका भरोसा जीतने की कोशिश की गई। इसके बाद उसे अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ठगों के कहने पर कई बैंक खातों में कुल ₹3 करोड़ 26 लाख 40 हजार ट्रांसफर कर दिए। आरोप है कि रकम जमा कराने के बाद जब शिकायतकर्ता ने अपना पैसा और कथित मुनाफा वापस लेने की कोशिश की तो उससे दोबारा रकम मांगी गई। अतिरिक्त भुगतान की मांग से उसे शक हुआ और उसे अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना साउथ की टीम ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और उनमें रकम के आने-जाने की जानकारी जुटाई। वित्तीय जांच के दौरान एक कंपनी के बंधन बैंक खाते में ठगी की रकम में से ₹24 लाख पहुंचने की जानकारी सामने आई। जांच में यह भी पता चला कि इस रकम में से ₹6 लाख 60 हजार दो रुपये आगे एक अन्य कंपनी के एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, एक्सिस बैंक का यह खाता आरोपी मालीराम मीणा के नाम पर था। जांच के दौरान खाते से जुड़े दस्तावेज और लेनदेन की जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान की। इसके बाद टीम ने जयपुर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने अपनी फर्म का बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को ₹1.40 लाख में उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार, मालीराम चाय की दुकान चलाता है और उसने दुकान के नाम पर एक फर्म बनाई थी। इसी फर्म के नाम से बैंक खाता खोला गया था। आरोप है कि बाद में उसने यह बैंक खाता साइबर ठगी में शामिल लोगों को इस्तेमाल के लिए दे दिया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने बैंक खाता किस व्यक्ति को उपलब्ध कराया था और उसके बाद खाते का संचालन किन लोगों ने किया। पुलिस ठगी की रकम के पूरे मनी ट्रेल को भी खंगाल रही है, ताकि यह पता चल सके कि ₹3.26 करोड़ से अधिक की रकम किन-किन खातों में पहुंची और वहां से आगे कहां भेजी गई।
पुलिस आरोपी से उसके बैंक खाते में आए और वहां से ट्रांसफर किए गए पैसों के संबंध में पूछताछ कर रही है। साथ ही, कथित साइबर ठगी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मालीराम ने पहले भी किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह को बैंक खाता उपलब्ध कराया था या नहीं।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर ठगी में बैंक खातों को किराये या कमीशन के बदले उपलब्ध कराना एक गंभीर समस्या बन चुका है। ठग अक्सर ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जो अपने नाम पर खाते खुलवाकर उन्हें दूसरे लोगों के इस्तेमाल के लिए दे देते हैं। इन खातों के जरिए रकम कई स्तरों पर ट्रांसफर की जाती है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराने से उसकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती और जांच में खाता धारक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
गुरुग्राम का यह मामला शेयर बाजार में ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को भी सामने लाता है। अधिक मुनाफे का लालच देकर पहले विश्वास कायम करना और फिर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कराना ऐसे अपराधों में इस्तेमाल होने वाला तरीका है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और ठगी की रकम की आगे की आवाजाही का पता लगाने में जुटी है।
