सरगुजा में कृषि विस्तार अधिकारी के नाम पर विभिन्न बैंकों से ₹1.05 करोड़ का होम लोन स्वीकृत कराकर ₹57.55 लाख की कथित ठगी के मामले में पांच लोगों पर केस दर्ज

गुरुग्राम में फ्लैट नाम पर करोड़ों की ठगी: दिल्ली एयरपोर्ट से आरोपी गिरफ्तार, विदेश भागने की तैयारी में था

Team The420
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दिल्ली-एनसीआर में फैले फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के एक बड़े मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो विदेश भागने की तैयारी में था। यह मामला सेक्टर-55 स्थित सुनहरा अपना घर सोसाइटी से जुड़ा है, जहां लोगों से निवेश के नाम पर भारी रकम वसूली गई थी।

शिकायत वर्ष 2017 में दर्ज की गई थी, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2006-07 में ईशपाल भारद्वाज नामक व्यक्ति ने उसे फ्लैट दिलाने का आश्वासन दिया और बाद में अलग-अलग किस्तों में लगभग 37.50 लाख रुपये लिए गए। लंबे समय तक न तो फ्लैट मिला और न ही रकम वापस की गई।

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जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी अनुभव (33), जो ईशपाल भारद्वाज का बेटा है, अपने पिता और अन्य साथियों अमित कुमार, प्रदीप कुमार, संदीप और जगबीर के साथ मिलकर फर्जी एमओयू और बैंक खातों के जरिए निवेशकों से धन एकत्र करता था और बाद में उसका गबन किया जाता था।

पुलिस ने बताया कि आरोपी वर्ष 2008 से 2013 के बीच लोगों से पैसे वसूलते रहे और परियोजना का निर्माण बंद होने के बाद भी न तो फ्लैट दिए गए और न ही निवेशकों को उनकी रकम लौटाई गई। बाद में शिकायत दर्ज होने पर जांच शुरू हुई।

मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें ईशपाल भारद्वाज, अनुभव, अमित कुमार, प्रदीप कुमार, संदीप और जगबीर शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है और आगे की बरामदगी व पूछताछ जारी है।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने फर्जी एमओयू, बैंक खातों और कंपनी संरचना का इस्तेमाल कर निवेशकों को झांसे में लिया और करोड़ों रुपये की ठगी की। विदेश भागने की कोशिश कर रहे आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।

इस मामले में जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या यह केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित धोखाधड़ी है या इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। सभी वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में लोगों को बिना सत्यापन किसी भी निवेश योजना या फ्रेंचाइजी ऑफर पर भरोसा नहीं करना चाहिए, खासकर जब नकद लेनदेन पर जोर दिया जाए। शिकायत दर्ज कराने के लिए साइबर और आर्थिक अपराध इकाइयों से संपर्क करने की अपील की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आधारित बिजनेस मॉडल में तेजी से बढ़ते फ्रॉड मामलों के पीछे मुख्य कारण बिना वैध दस्तावेजों और उचित नियामकीय जांच के निवेश का किया जाना है। ऐसे मामलों में ठग पहले भरोसा जीतते हैं और फिर नकद लेनदेन व फर्जी एग्रीमेंट के जरिए पैसे निकाल लेते हैं। बाद में पीड़ित को कानूनी प्रक्रिया में उलझाकर नुकसान पहुंचाया जाता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रहे ऐसे मामलों की निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है और साइबर सेल को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है। जांच के दौरान बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल लोकेशन डेटा और डिजिटल एग्रीमेंट की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की पहचान की जा सके और अन्य संभावित पीड़ितों तक पहुंचा जा सके।

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है, जहां लोग सोशल मीडिया पर दिखने वाले हाई रिटर्न ऑफर और फ्रेंचाइजी स्कीमों पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता की कमी के कारण लोग आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं और बाद में लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का नुकसान होता है।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों की रकम की रिकवरी की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।

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