गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में साइबर पुलिस ने दो अलग-अलग साइबर ठगी मामलों का खुलासा करते हुए ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश किया है, जिनके तार कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक गिरोह टेलीग्राम पर “वर्क फ्रॉम होम” और “टास्क पूरा कर कमाई” का झांसा देकर लोगों से ठगी करता था। इसके बाद ठगी की रकम को बैंक खातों के माध्यम से निकालकर USDT (Tether) क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जाता था और डिजिटल चैनलों के जरिए कंबोडिया से संचालित कथित साइबर नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य मामले में CISF कैंटीन के खरीद विभाग का कर्मचारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, टेलीग्राम टास्क ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान योगेश रावत, अमित अग्रवाल, अनिकेत, संजय श्रीवास उर्फ अनु और घनश्याम लोढ़ा के रूप में हुई है। जांच के दौरान एक महिला खाताधारक की भूमिका भी सामने आई है, जिसके बैंक खाते का कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में उपयोग किया गया। आरोपियों के कब्जे से ₹1,32,573 नकद और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लोगों को घर बैठे कमाई, ऑनलाइन टास्क और निवेश जैसे आकर्षक प्रस्ताव भेजकर अपने जाल में फंसाता था। शुरुआत में पीड़ितों को छोटे-छोटे भुगतान कर विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद अधिक लाभ का लालच देकर उनसे बड़ी रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस का आरोप है कि एक बार धनराशि प्राप्त होने के बाद उसे विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर नकद निकाला जाता और फिर क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदल दिया जाता था।
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जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों की मुख्य भूमिका म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराना और ठगी की रकम को विभिन्न चरणों में आगे बढ़ाना थी। पूछताछ में सामने आया है कि रकम को USDT में परिवर्तित करने के बाद टेलीग्राम पर साझा किए गए विशेष लिंक और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से विदेश में बैठे कथित साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब क्रिप्टो वॉलेट, बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है।
यह मामला भारत कॉलोनी निवासी एक महिला की शिकायत के बाद सामने आया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसे टेलीग्राम पर घर बैठे कमाई का झांसा दिया गया और अलग-अलग टास्क पूरे करने के नाम पर उससे ₹1.32 लाख की ठगी कर ली गई। शिकायत के आधार पर साइबर थाना सेंट्रल ने जांच शुरू की, जिसके बाद इस नेटवर्क का खुलासा हुआ।
इसी दौरान पुलिस ने एक अन्य साइबर ठगी मामले का भी पर्दाफाश किया, जिसमें आरोपियों ने स्वयं को CISF कैंटीन के खरीद विभाग का कर्मचारी बताकर एक कारोबारी से ₹2.53 लाख की कथित ठगी की। जांच के दौरान इस मामले में भी पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों मामलों में उपयोग किए गए बैंक खाते, मोबाइल नंबर, डिजिटल भुगतान माध्यम या अन्य तकनीकी संसाधनों के बीच कोई समानता है या नहीं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, टेलीग्राम आधारित निवेश और टास्क फ्रॉड अब अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट का प्रमुख तरीका बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी म्यूल बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश करते हैं, जिससे जांच अधिक जटिल हो जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले “घर बैठे कमाई”, “टास्क पूरा कर कमाई” या अत्यधिक मुनाफे के किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, निवेश लिंक या भुगतान निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
