गुरुग्राम: केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आयुक्तालय, गुरुग्राम की एंटी-इवेजन शाखा ने ₹200 करोड़ के कथित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का खुलासा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गुरुग्राम स्थित एक ऑटोमोबाइल सर्विस स्टार्टअप के दो सह-संस्थापक और दो चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं। सभी आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय नेटवर्क, लाभार्थियों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
CGST अधिकारियों के अनुसार यह कथित घोटाला लगभग 30 शेल कंपनियों के माध्यम से अंजाम दिया गया। आरोप है कि इन कंपनियों ने बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति और बिना GST जमा किए फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी किए। इन्हीं फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लिया गया, जिससे सरकारी खजाने को लगभग ₹200 करोड़ का नुकसान हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच सीमा शुल्क (कस्टम्स) विभाग से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू की गई थी। करीब छह से आठ महीने तक चली जांच के दौरान अधिकारियों ने बैंकिंग लेनदेन, कंपनी रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज और वित्तीय गतिविधियों का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में कई काल्पनिक कंपनियों का ऐसा नेटवर्क सामने आया, जिनका उद्देश्य केवल फर्जी बिल तैयार करना, लेनदेन की परतें बनाना और धन के वास्तविक प्रवाह को छिपाना था।
जांच में यह भी सामने आया कि कागजों पर बड़े पैमाने पर बिलिंग दिखाई गई, लेकिन न तो वस्तुओं की वास्तविक आपूर्ति हुई और न ही सरकार के खाते में GST जमा किया गया। अधिकारियों का आरोप है कि शेल कंपनियों का उपयोग केवल कृत्रिम व्यावसायिक लेनदेन दिखाकर अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने के लिए किया गया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार मुख्य आरोपी वर्ष 2016-17 में स्थापित एक ऑन-डिमांड ऑटोमोबाइल सर्विस और बैटरी सहायता स्टार्टअप के पूर्व संस्थापक निदेशक रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2021 के बाद उन्होंने कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाकर और फर्जी इनवॉइस तैयार कर GST लाभ का अवैध दावा करना शुरू किया।
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अधिकारियों का आरोप है कि आरोपियों ने अपनी वित्तीय और पेशेवर विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर ऐसा जटिल ढांचा तैयार किया, जिससे लंबे समय तक इस कथित धोखाधड़ी का पता न चल सके। जांच में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। आरोप है कि उन्होंने शेल कंपनियों की संरचना तैयार करने, वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित करने और विभिन्न संस्थाओं के बीच फर्जी बिलिंग नेटवर्क संचालित करने में अहम भूमिका निभाई।
शनिवार को आरोपियों को पूछताछ के लिए CGST कार्यालय में तलब किया गया था। पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने उनके सामने दस्तावेजी साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े प्रमाण रखे। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसियों ने बताया कि अब तक इस मामले में किसी प्रकार की वित्तीय वसूली नहीं हो सकी है। हालांकि विभिन्न बैंक खातों, कंपनियों और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित घोटाले से किन-किन व्यक्तियों और संस्थाओं को लाभ पहुंचा और पूरे नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या फर्जी वित्तीय रिकॉर्ड तैयार कर स्टार्टअप की वैल्यूएशन कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया था। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि प्रस्तावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) या संभावित हिस्सेदारी बिक्री से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति को वास्तविक से अधिक मजबूत दिखाने के लिए कागजी लेनदेन और फर्जी राजस्व का सहारा तो नहीं लिया गया।
कर विशेषज्ञों के अनुसार फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले GST व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉइस तैयार कर टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लेने से न केवल सरकार को भारी राजस्व हानि होती है, बल्कि वैध कारोबारियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति भी पैदा होती है। CGST अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां, वित्तीय वसूली तथा अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
