गुजरात के वडोदरा में बुजुर्ग को 18 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर फर्जी सरकारी अधिकारियों के नाम पर ₹1.47 करोड़ की साइबर ठगी की गई।

₹1.47 करोड़ की ठगी, 18 दिन का ‘डिजिटल अरेस्ट’ ट्रैप: गुजरात में बुजुर्ग को बनाया साइबर फ्रॉड का शिकार

Team The420
5 Min Read

गुजरात के वडोदरा शहर में एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग को 18 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर संगठित साइबर गिरोह ने ₹1.47 करोड़ की ठगी कर ली। यह पूरा मामला एक सुनियोजित साइबर अपराध का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताकर पीड़ित को मानसिक रूप से बंधक बना लिया।

शिकायत के अनुसार, यह घटना 10 मार्च 2026 को शुरू हुई जब बुजुर्ग को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को TRAI का अधिकारी “मानव शर्मा” बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक अवैध मोबाइल नंबर जारी किया गया है, जिसका उपयोग आपत्तिजनक गतिविधियों में हो रहा है।

FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders

इसके बाद पीड़ित को एक और कॉल पर मुंबई क्राइम ब्रांच से जुड़े होने का दावा किया गया। कुछ ही देर में व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति सामने आया, जिसने खुद को CBI अधिकारी “विजय प्रकाश” बताया। उसने आरोप लगाया कि पीड़ित के नाम पर खोले गए बैंक खाते का उपयोग ₹538 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।

ठगों ने भय का माहौल बनाने के लिए लगातार गिरफ्तारी वारंट, संपत्ति जब्ती और आपराधिक कार्रवाई की धमकी दी। इतना ही नहीं, उन्होंने फर्जी FIR, नकली CBI नोटिस और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के जाली दस्तावेज भी भेजकर मामले को वास्तविक दिखाने की कोशिश की।

जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसमें अलग-अलग लोग खुद को CBI अधिकारी, IPS अधिकारी, वकील और जज बताकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को लगातार दबाव में रखते थे। इस दौरान बुजुर्ग और उनकी पत्नी को हर समय कॉल पर उपलब्ध रहने और किसी भी रिश्तेदार से बात न करने की सख्त हिदायत दी गई।

पुलिस के अनुसार, यह “डिजिटल अरेस्ट” 10 मार्च से 27 मार्च तक चला। इस दौरान हर दो घंटे में वीडियो कॉल कर मानसिक दबाव बनाया गया और पीड़ित को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया।

लगातार दबाव के चलते ठगों ने पीड़ित को अपनी जमा पूंजी निकालने पर मजबूर किया। उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने, बीमा पॉलिसी खत्म करने और अन्य निवेश नकद में बदलकर बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद रकम अलग-अलग खातों में भेजने के लिए कहा गया।

जांच में सामने आया कि 19 मार्च को SBI खाते से RTGS के जरिए ₹1.40 करोड़ ट्रांसफर किए गए, जबकि 27 मार्च को ₹19 लाख और भेजे गए। इस तरह कुल ₹1.59 करोड़ की राशि ठगों तक पहुंच गई। बाद में लगातार दबाव के बावजूद और पैसे की मांग की जाती रही।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक अधिकारियों ने संदिग्ध लेनदेन देखकर पीड़ित की बेटी से संपर्क किया। पूछताछ में पूरा घटनाक्रम सामने आया, जिसके बाद परिवार को समझ आया कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड है। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई।

अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से कुछ राशि को फ्रीज कर लिया गया, जिससे ₹11.36 लाख की रिकवरी संभव हो सकी। हालांकि अभी भी लगभग ₹1.47 करोड़ की राशि वापस नहीं मिल पाई है।

वडोदरा साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और पूरे पैसे के ट्रांजेक्शन रूट तथा गिरोह के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह देशभर में फैला हो सकता है और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को निशाना बना रहा है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम हाल के समय में तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां अपराधी सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से नियंत्रित कर लेते हैं और बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम पर आने वाले कॉल, वीडियो कॉल या धमकी भरे संदेशों पर भरोसा न करें और तुरंत स्थानीय साइबर सेल या हेल्पलाइन से संपर्क करें।

हमसे जुड़ें

Share This Article