दासक्रोई तालुका के धमटवन गांव में पूर्व सरपंच और तलाटी-कम-मंत्री के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को कथित सत्ता के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज किया। यह मामला ग्राम पंचायत के अपने फंड से 2022-23, 2023-24 और 2024-25 वित्तीय वर्षों के दौरान हुए खर्च से जुड़ा है।
एफआईआर में कहा गया है कि विभिन्न मदों जैसे मिट्टी भराई, पानी की आपूर्ति, त्योहारों के आयोजन और कर्मचारियों के वेतन में खर्च बिना आवश्यक प्रस्ताव या तकनीकी अनुमोदन के किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इन खर्चों का कोई उचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
सूत्रों के अनुसार, पंचायत कर्मचारियों का वेतन उनके बैंक खातों में ट्रांसफर नहीं किया गया। इसके बजाय, भुगतान गांव के कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम पर बियरर चेक द्वारा किया गया। जांच में पाया गया कि दोनों अधिकारी अपनी पद का दुरुपयोग कर सरकारी फंड को निजी उपयोग के लिए मोड़ रहे थे।
एसीबी ने आरोप लगाया कि इस मिलकर किए गए घोटाले से सरकार को लगभग ₹1.55 करोड़ का नुकसान हुआ और आरोपियों ने अपने लिए संपत्ति अर्जित की। मामला दर्ज होने के बाद विभाग ने तुरंत जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है।
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जानकारों के अनुसार, ग्राम पंचायतों में ऐसी अनियमितताओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार अधिकारी या कर्मचारी अपनी सुविधा के लिए फंड का गलत इस्तेमाल करते हैं, जबकि निगरानी तंत्र कमजोर रहता है।
कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत फंड के खर्च पर कड़ी निगरानी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी अनुमोदन और पारदर्शी रिकॉर्डिंग के बिना किसी भी खर्च को मंजूरी देना गंभीर वित्तीय लापरवाही मानी जाती है।
गांव में स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई परियोजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं पहुंचा। कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि मिट्टी भराई और पानी की आपूर्ति के लिए किए गए काम में अनियमितताएं देखी गईं।
एसीबी की टीम ने यह भी कहा कि मामले में दोनों आरोपियों की संपत्ति और बैंक लेनदेन की जांच की जाएगी। आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लाभ की पुष्टि के लिए विस्तृत वित्तीय ऑडिट कराया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई न की गई, तो ऐसे मामलों से ग्रामीण विकास के कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई से भविष्य में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी। स्थानीय समुदाय और प्रशासनिक तंत्र को मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि फंड का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।
इस मामले में एसीबी का अगला कदम आरोपियों से पूछताछ करना और दस्तावेजों की जांच करना बताया गया है। ग्रामीण प्रशासन और राज्य सरकार के लिए यह एक चेतावनी है कि पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
