अशोक खरात मामले में 130 से अधिक फर्जी बैंक खातों और ₹63 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच करते अधिकारी।

‘लोन और सरकारी योजना के नाम पर साइबर जाल’: खातों का दुरुपयोग कर करोड़ों की ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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गोरखपुर। बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि लखनऊ, वाराणसी और भदोही के तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

जांच में सामने आया है कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी पहले बेरोजगार या जरूरतमंद लोगों को लोन दिलाने और सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने का लालच देते थे। इसके बाद उनसे आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते या मौजूदा खातों का एक्सेस हासिल कर लेते थे।

खाता खुलवाने के बाद आरोपी पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में रख लेते थे और इन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर और ठिकाने लगाते थे। कई मामलों में खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर उनके खाते इस्तेमाल किए जाते थे।

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक शिक्षक ने अपने बैंक खाते के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि आरोपियों ने उनके खाते और उससे जुड़े एटीएम, चेकबुक और सिम कार्ड को अपने कब्जे में लेकर लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए। खाते के फ्रीज होने के बाद पीड़ित को ठगी की जानकारी हुई।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे 10 खातों का पता चला, जिनके जरिए लाखों रुपये का लेनदेन किया गया। अधिकारियों का मानना है कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है और उनकी पहचान की जा रही है।

पूछताछ और छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, दो लैपटॉप, आठ कूटरचित मुहरें, 28 हस्ताक्षरित चेक, चार पासबुक, तीन एटीएम कार्ड और दो चेकबुक बरामद की गई हैं। इससे साफ है कि गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार करने और वित्तीय लेनदेन को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा था।

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जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन भी दिलवाते थे। उनके पास से भू-नक्शा तैयार करने के लिए राजस्व विभाग समेत अन्य विभागों के कूटरचित स्टांप भी बरामद हुए हैं। जरूरत के मुताबिक वे नकली दस्तावेज तैयार कर निजी और सरकारी संस्थानों से ऋण स्वीकृत कराने में मदद करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों में ध्रुव साहनी, सूरज सिंह, अजय उपाध्याय, अखंड प्रताप सिंह, बृजेंद्र कुमार सिंह, अभिषेक कुमार यादव और अमर कुमार निषाद शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है और फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “ऐसे मामलों में साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं। वे लोगों को आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके बैंकिंग एक्सेस हासिल कर लेते हैं और फिर उन्हीं खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी के लिए करते हैं।”

उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम या दस्तावेज सौंपना बेहद खतरनाक हो सकता है।

फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

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