फर्म के नाम पर खाता खुलवाने के बाद खाते से जुड़ा सिम भी ले जाने का आरोप; राजस्थान से वित्तीय अनियमितता की सूचना मिलने पर सामने आया पूरा मामला

दस्तावेज और सिम के सहारे खुलवाया म्यूल खाता, ₹75 लाख के साइबर लेनदेन का खुलासा; बैंक कर्मचारी समेत तीन गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
6 Min Read

गोरखपुर: साइबर ठगी के लिए बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल करने के एक मामले में गोरखपुर की रामगढ़ताल पुलिस ने बंधन बैंक के कर्मचारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि फर्म के नाम पर बैंक खाता खुलवाने के लिए कारोबारी के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और बाद में खाते से जुड़े मोबाइल सिम को भी अपने कब्जे में ले लिया गया। जांच के दौरान इस खाते में करीब ₹75 लाख के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला। रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बंधन बैंक, तारामंडल में कर्मचारी संतकबीरनगर के बखिरा निवासी हरीश कुमार सिंह, रायगंज निवासी सुशांत विश्वकर्मा और काली मंदिर, कुनराघाट निवासी विनय साहनी के रूप में हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के किस नेटवर्क ने किया और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पहले खुलवाया खाता, फिर बंद कराने के बाद दोबारा संपर्क

शिकायतकर्ता के अनुसार, हरीश कुमार सिंह के बार-बार अनुरोध करने पर वर्ष 2023 में उसकी फर्म के नाम से बंधन बैंक में एक खाता खुलवाया गया था। हालांकि बैंक की सेवाओं से संतुष्ट नहीं होने पर उसी वर्ष खाते को बंद कराने के लिए आवेदन कर दिया गया।

आरोप है कि वर्ष 2025 में हरीश ने बेहतर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देकर शिकायतकर्ता से दोबारा दस्तावेज लिए। इसके बाद फर्म के नाम से फिर एक बैंक खाता खुलवाया गया। खाते से संबंधित जानकारी कथित तौर पर व्हाट्सऐप के माध्यम से शिकायतकर्ता को भेजी गई थी।

शुरुआत में इस खाते को लेकर शिकायतकर्ता को किसी तरह की असामान्य गतिविधि का अंदाजा नहीं हुआ। बाद में खाते में हुए बड़े वित्तीय लेनदेन ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया।

वाहन लोन के बहाने भी लिए दस्तावेज

शिकायत के मुताबिक, अप्रैल 2026 में शिकायतकर्ता ने वाहन खरीदने के लिए बैंक से लोन की जानकारी मांगी थी। इस दौरान हरीश ने आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज लिए। हालांकि ईएमआई अधिक होने के कारण वाहन खरीदने का फैसला आगे नहीं बढ़ा और लोन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई।

आरोप है कि इसके बाद मई में हरीश वर्ष 2023 में खुले बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड भी अपने साथ ले गया। बाद में उसने व्हाट्सऐप के जरिए इसकी जानकारी शिकायतकर्ता को दी। शिकायतकर्ता को उस समय भी कथित तौर पर यह अंदाजा नहीं था कि उसके दस्तावेज, बैंक खाता और सिम का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

राजस्थान से आई सूचना तो सामने आया ₹75 लाख का लेनदेन

मामले का खुलासा 27 जून को हुआ। शिकायतकर्ता को राजस्थान से जानकारी मिली कि उसके बैंक खाते में संदिग्ध या अवैध वित्तीय लेनदेन हुआ है और उसे अपना पक्ष रखने के लिए वहां बुलाया गया है।

इसके बाद खाते की गतिविधियों की जांच की गई तो करीब ₹75 लाख की रकम के संदिग्ध लेनदेन का पता चला। जानकारी के अनुसार, यह रकम खाते में आने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इससे शिकायतकर्ता को संदेह हुआ कि उसके दस्तावेजों और बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के लिए किया गया।

इसके बाद उसने रामगढ़ताल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने खाते से जुड़े दस्तावेज, लेनदेन और आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू की।

बैंक कर्मचारी पर दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर बैंक खाता खुलवाया गया। खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और सिम का इस्तेमाल भी संदिग्ध लेनदेन में किए जाने की आशंका है।

जांच में करीब ₹75 लाख का साइबर ठगी से संबंधित लेनदेन सामने आने के बाद पुलिस ने हरीश कुमार सिंह, सुशांत विश्वकर्मा और विनय साहनी को गिरफ्तार किया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खाते में रकम भेजने वाले और रकम आगे ट्रांसफर कराने वाले लोग कौन थे।

साइबर नेटवर्क की अन्य कड़ियां खंगाली जा रहीं

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के साथ बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, सिम और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि खाते का इस्तेमाल कितने समय तक किया गया और इसके जरिए कितने साइबर अपराधों की रकम का लेनदेन हुआ।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर और म्यूल खाते खोले गए। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला दिखाता है कि बैंक खाता, मोबाइल सिम और पहचान दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खाताधारकों को अपने नाम पर खुले बैंक खातों और उनसे जुड़े मोबाइल नंबरों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। किसी भी अनजान लेनदेन की जानकारी मिलते ही बैंक और साइबर अपराध संबंधी आधिकारिक माध्यमों को तत्काल सूचना देना जरूरी है।

हमसे जुड़ें

Share This Article