New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत Gameskraft Technologies Pvt. Ltd., उसके शेयरधारकों और उससे जुड़ी संस्थाओं की लगभग ₹1,906 करोड़ मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) किया है। एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत कथित अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) के सृजन और धनशोधन की जांच के संबंध में की गई है।
ED के अनुसार, अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में कंपनी और उससे संबद्ध संस्थाओं से जुड़ी विभिन्न चल एवं अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई व्यापक वित्तीय जांच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन संपत्तियों का पता लगाना है, जिनके कथित रूप से अवैध धनशोधन से जुड़े होने की आशंका है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह केवल अस्थायी कुर्की है और अंतिम निर्णय PMLA के तहत सक्षम प्राधिकरण द्वारा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
जांच एजेंसी के अनुसार, उसकी जांच Gameskraft Technologies Pvt. Ltd., उसके शेयरधारकों और संबद्ध संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन, स्वामित्व संरचना तथा धन के प्रवाह की विस्तृत पड़ताल पर केंद्रित है। जांचकर्ता कॉरपोरेट रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, लेखा दस्तावेजों और अन्य वित्तीय अभिलेखों का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कुर्क की गई संपत्तियां कानून के तहत अपराध से अर्जित आय की श्रेणी में आती हैं या नहीं।
जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने 7 मई से 13 मई, 2026 के बीच कंपनी के कार्यालयों के साथ-साथ उसके निदेशकों और कुछ कर्मचारियों के आवासों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद 20 और 21 जून, 2026 को दोबारा तलाशी ली गई, जिसके दौरान जांच एजेंसी ने दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री एकत्र की, जिन्हें जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान प्राप्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि वित्तीय लेनदेन की प्रकृति, धन के प्रवाह और PMLA के संभावित उल्लंघनों का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित अपराध से अर्जित धन का लाभ किन व्यक्तियों या संस्थाओं को मिला और क्या इस मामले में अन्य संबंधित पक्ष भी शामिल हैं।
PMLA के तहत संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का उद्देश्य जांच के दौरान उन परिसंपत्तियों के हस्तांतरण, बिक्री, छिपाने या अन्य तरीके से निपटान को रोकना होता है, जिनके अपराध से जुड़े होने की आशंका होती है। हालांकि, ऐसी कुर्की को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाता। प्रभावित पक्षों को कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया में भाग लेने का पूरा अधिकार प्राप्त होता है।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार, बड़े वित्तीय अपराधों की जांच में आज डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय खुफिया विश्लेषण, कॉरपोरेट रिकॉर्ड और लेनदेन संबंधी डेटा का एकीकृत अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञ का कहना है कि संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क अक्सर कई कंपनियों, जटिल वित्तीय लेयरिंग और डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग कर धन के वास्तविक स्रोत और प्रवाह को छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा विश्लेषण, डिजिटल फोरेंसिक और वित्तीय निगरानी तकनीकें संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने फिलहाल जांच के विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं और कहा है कि मामला अभी जांच के अधीन है। एजेंसी जब्त दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी रखे हुए है ताकि कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके। जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे PMLA तथा अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
