नई दिल्ली: अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury) की वित्तीय खुफिया इकाई फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) ने दावा किया है कि उसके रैपिड रिस्पॉन्स प्रोग्राम ने साइबर सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी लगभग 2 अरब डॉलर (करीब ₹17,200 करोड़) की चोरी की गई रकम को रोकने में सफलता हासिल की है। एजेंसी के अनुसार, इस पहल से 5,700 से अधिक अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों को राहत मिली है, जिनकी धनराशि साइबर अपराधियों द्वारा विदेश भेजी जा रही थी।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House Financial Services Subcommittee) की सुनवाई के दौरान FinCEN की निदेशक एंड्रिया गैकी ने बताया कि वर्ष 2015 में शुरू किए गए रैपिड रिस्पॉन्स प्रोग्राम का उद्देश्य साइबर ठगी के मामलों में विदेश भेजी गई रकम का तत्काल पता लगाना, संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करना और पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक करीब 2 अरब डॉलर की चोरी की गई राशि को रोका जा चुका है।
गैकी ने बताया कि FinCEN ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज की है। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने Huione Group नामक नेटवर्क को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग कर दिया, जिस पर कम से कम 4 अरब डॉलर की अवैध धनराशि की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। एजेंसी ने इस समूह के खिलाफ अक्टूबर 2025 में कार्रवाई शुरू की थी और पिछले महीने उससे जुड़ी उत्तराधिकारी संस्थाओं के खिलाफ भी अतिरिक्त कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में वित्तीय अपराधों से प्राप्त अवैध धन का सबसे बड़ा स्रोत अब भी धोखाधड़ी है। FinCEN ने सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य लाभ कार्यक्रमों को निशाना बनाने वाली कई धोखाधड़ी योजनाओं के समान पैटर्न की पहचान की है। एजेंसी नियमित रूप से बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अलर्ट जारी करती है, संदिग्ध लेनदेन का विश्लेषण उपलब्ध कराती है तथा वित्तीय संस्थानों को रियल-टाइम में धोखाधड़ी संबंधी जानकारी साझा करने के लिए दिशा-निर्देश भी प्रदान करती है।
सुनवाई के दौरान गैकी ने यह भी बताया कि FinCEN अपने व्हिसलब्लोअर प्रोग्राम को पूरी तरह परिचालित करने की दिशा में काम कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने फरवरी में गोपनीय शिकायतें प्राप्त करने के लिए एक समर्पित वेबसाइट शुरू करने की घोषणा की थी। अप्रैल में प्रस्तावित नियम जारी कर पुरस्कार पात्रता, गोपनीयता और प्रक्रिया से जुड़े मानदंड तय किए गए। उन्होंने कहा कि एजेंसी को प्राप्त शिकायतों की सक्रिय रूप से जांच की जा रही है और अंतिम नियम लागू होने के बाद पात्र सूचनादाताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे।
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हालांकि, सुनवाई के दौरान अमेरिकी वित्तीय निगरानी प्रणाली की सीमा और प्रभावशीलता को लेकर मतभेद भी सामने आए। उपसमिति के अध्यक्ष वॉरेन डेविडसन ने कहा कि वित्तीय संस्थान हर वर्ष लगभग 50 लाख संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट (SARs) और 2.1 करोड़ से अधिक करेंसी ट्रांजेक्शन रिपोर्ट (CTRs) जमा करते हैं। उनका तर्क था कि वर्तमान व्यवस्था वित्तीय संस्थानों पर भारी अनुपालन बोझ डालती है, जबकि उसके अनुपात में परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद जॉयस बीटी ने वित्तीय निगरानी उपायों को कमजोर करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अपराधी अब तेजी से क्रिप्टोकरेंसी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने FBI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में अमेरिकी नागरिकों को साइबर सक्षम अपराधों से लगभग 21 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जो वर्ष 2024 के 16 अरब डॉलर की तुलना में काफी अधिक है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, धन का प्रवाह अक्सर कई देशों के बैंक खातों, क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान चैनलों से होकर गुजरता है। ऐसे में रियल-टाइम अंतरराष्ट्रीय सहयोग, त्वरित बैंक खाता फ्रीज करने की व्यवस्था, वित्तीय खुफिया इकाइयों के बीच सूचना साझा करना और डिजिटल फोरेंसिक जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती घंटों में समन्वित कार्रवाई हो जाए तो बड़ी मात्रा में ठगी गई धनराशि को अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही रोका जा सकता है।
FinCEN ने दोहराया कि एजेंसी धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण, प्रतिबंधों के उल्लंघन, साइबर धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और त्वरित वित्तीय खुफिया साझाकरण भविष्य में वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने के सबसे महत्वपूर्ण उपकरण साबित होंगे।
