अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के उप निदेशक ने एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि “चीनी आपराधिक संगठनों” का संबंध दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे फैले स्कैम कंपाउंड्स से जुड़ा हुआ है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और संगठित ठगी नेटवर्क को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
FBI के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ये स्कैम कंपाउंड्स कई देशों में सक्रिय हैं और इनमें संगठित तरीके से ऑनलाइन धोखाधड़ी, निवेश घोटाले, क्रिप्टो फ्रॉड और फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेशन चलाए जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इन केंद्रों का नेटवर्क मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है जहां कमजोर कानून-व्यवस्था और सीमा पार गतिविधियों का फायदा उठाया जाता है।
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अधिकारी ने यह भी कहा कि इन कंपाउंड्स में कई मामलों में मानव तस्करी और जबरन श्रम के संकेत भी मिले हैं। लोगों को नौकरी का झांसा देकर या कर्ज के दबाव में इन केंद्रों में लाया जाता है और फिर उनसे साइबर फ्रॉड गतिविधियां करवाई जाती हैं। इन गतिविधियों में फर्जी निवेश योजनाएं, रोमांस स्कैम और सोशल इंजीनियरिंग आधारित धोखाधड़ी शामिल हैं।
दावा किया गया है कि इन नेटवर्क्स का संचालन केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें वित्तीय लेनदेन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है जिससे अपराधियों को ट्रैक करना और भी कठिन हो जाता है।
अधिकारी ने संकेत दिया कि China से जुड़े कुछ आपराधिक नेटवर्क इन गतिविधियों में अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं हालांकि जांच एजेंसियां सभी संभावित लिंक की जांच कर रही हैं। उन्होंने इसे एक “वैश्विक साइबर अपराध पारिस्थितिकी तंत्र” बताया जो तेजी से विस्तार कर रहा है।
एफबीआई ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदार एजेंसियों के साथ मिलकर इन नेटवर्क्स के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है। इसमें वित्तीय ट्रेल की जांच, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को ट्रैक करना और संदिग्ध स्कैम कॉल सेंटरों पर छापेमारी शामिल है। एजेंसी का कहना है कि यह लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था की नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा की भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्कैम कंपाउंड्स का सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये अलग-अलग देशों में फैले होने के बावजूद एक ही संगठित नेटवर्क की तरह काम करते हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि हजारों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शोषण का शिकार भी बनते हैं।
एफबीआई अधिकारी के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। कई देशों की एजेंसियां अब इस तरह के नेटवर्क की मैपिंग और संयुक्त ऑपरेशनों पर काम कर रही हैं ताकि इस बढ़ते खतरे को रोका जा सके।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया के म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे क्षेत्रों में ऐसे कई स्कैम कंपाउंड्स सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में सीमावर्ती इलाकों की कमजोर निगरानी और आर्थिक दबाव का फायदा उठाकर आपराधिक नेटवर्क अपने संचालन को विस्तार देते हैं।
इन कंपाउंड्स में काम करने वाले लोगों को अक्सर वर्चुअल ठगी अभियानों में लगाया जाता है जिनमें पीड़ितों को झूठे निवेश अवसरों या क्रिप्टो योजनाओं के नाम पर फंसाया जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत होता जा रहा है।
अमेरिकी एजेंसियां अब इस प्रकार के साइबर अपराध नेटवर्क को आतंक वित्तपोषण और संगठित अपराध के व्यापक ढांचे से जोड़ कर देख रही हैं। इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा साझा करने और संयुक्त जांच अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क केवल आर्थिक अपराध ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन चुके हैं। आने वाले समय में इन पर नियंत्रण के लिए और सख्त अंतरराष्ट्रीय कानून और सहयोग की आवश्यकता बताई जा रही है।
समापन में यह कहा जा रहा है कि डिजिटल अपराध का यह नेटवर्क तेजी से विकसित हो रहा है और इसे रोकने के लिए वैश्विक समन्वय अनिवार्य माना जा रहा है।
