आदानी शांति ग्राम निवासी ने फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप Geosphere में ₹1.68 करोड़ गंवाए। विकास शर्मा, माइकल कुलिन्स बनकर ठगों ने फरवरी-मार्च में ट्रांसफर कराए। 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत, डिजिटल ट्रेल ट्रैकिंग शुरू।

स्टॉक निवेश का बड़ा फर्जीवाड़ा: अहमदाबाद निवासी ने गंवाई ₹1.68 करोड़, आरोपियों की खोज जारी

Team The420
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शहर के आदानी शांति ग्राम निवासी 45 वर्षीय एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसे फर्जी स्टॉक निवेश योजना में फंसाकर लगभग ₹1.68 करोड़ का नुकसान हुआ। आरोपियों ने WhatsApp ग्रुप और एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उसे निवेश करने के लिए प्रलोभित किया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में पीड़ित को ‘VIPS Stock Sharing Group’ नामक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया। इसके बाद आरोपियों ने ‘Victory Vanguards2’ ग्रुप के जरिए अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट और निवेश टिप्स साझा किए।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाकर खुद को ‘विकास शर्मा’ और ‘माइकल कुलिन्स’ के नाम से पेश किया। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों का उपयोग करके पीड़ित से संपर्क किया और उसे ‘Geosphere’ नामक ऐप में पंजीकरण कर निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

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पुलिस ने बताया कि पीड़ित को निवेश के बहाने बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मनाया गया। फरवरी और मार्च के बीच उसने अलग-अलग खातों में कई किस्तों में बड़ी रकम भेजी। आरोपियों ने कथित मुनाफे का झांसा देकर और फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर विश्वास हासिल किया और उसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने परिवार के साथ चर्चा की, जिन्होंने धोखाधड़ी का संदेह जताया। इसके बाद पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) से संपर्क किया और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने कहा कि पीड़ित ने कुल ₹1.68 करोड़ का निवेश किया, लेकिन उसे कोई मुनाफा या रिटर्न प्राप्त नहीं हुआ। आरोपियों ने कथित रूप से अतिरिक्त भुगतान की मांग भी विभिन्न बहानों से की, जिसमें निकासी प्रक्रिया के शुल्क शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस आरोपियों और संबंधित बैंक खातों का पता लगाने के साथ-साथ लेन-देन के डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर रही है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी मुनाफे के क्लेम का प्रयोग आम है। उन्होंने जोर दिया कि निवेश करते समय ऐप और ग्रुप की विश्वसनीयता की पुष्टि करना अनिवार्य है और किसी भी बड़े निवेश से पहले डिजिटल सत्यापन और ट्रांज़ैक्शन ट्रैकिंग जरूरी है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि शहर में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं, और पीड़ितों के परिवार को भी सतर्क रहना चाहिए।

साइबर क्राइम पुलिस टीम इस मामले में आरोपियों की पहचान और बैंक खातों की समीक्षा कर रही है। विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने कितने लोगों को फंसाया और कितनी रकम का दुरुपयोग किया।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते साइबर धोखाधड़ी पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो बड़े निवेशकों और आम लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल निवेश में सतर्कता और पुख़्ता जांच बेहद जरूरी है।

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