IRCTC जैसी फर्जी वेबसाइट बनाकर केदारनाथ और वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर टिकट के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी करने वाले साइबर गिरोह का दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया।

IRCTC जैसी नकली वेबसाइट बनाकर श्रद्धालुओं से ठगी: केदारनाथ-वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर टिकट के नाम पर चल रहा था संगठित साइबर रैकेट, तीन गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। धार्मिक स्थलों के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर देशभर के श्रद्धालुओं से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों—ओमप्रकाश कुमार, रोहित कुमार और श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम—को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह IRCTC जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को झांसे में लेता था।

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी श्रेयांश तिवारी एक पेशेवर वेब डेवलपर है, जिसने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल कर IRCTC और हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाताओं की आधिकारिक वेबसाइटों जैसी दिखने वाली कई नकली वेबसाइट तैयार की थीं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि अब तक करीब 30 साइबर शिकायतों में इस गिरोह की भूमिका पाई गई है, जिनमें लगभग ₹10 लाख की ठगी की पुष्टि हुई है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।

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मामले की शुरुआत तब हुई जब एक श्रद्धालु ने शिकायत दर्ज कराई कि केदारनाथ हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर उनसे ₹20,328 की धोखाधड़ी की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने “irctc-helicopter.com” और “irct-heliyatra.com” जैसी फर्जी वेबसाइटों के जरिए पूरा जाल बिछाया था।

इन वेबसाइटों को इस तरह डिजाइन किया गया था कि कोई भी आम यात्री इन्हें असली सरकारी पोर्टल समझ ले। वेबसाइटों का लेआउट, रंग संयोजन, बुकिंग प्रक्रिया और भुगतान इंटरफेस पूरी तरह असली वेबसाइट जैसा बनाया गया था। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि तकनीकी संचालन और वेबसाइट निर्माण की पूरी जिम्मेदारी श्रेयांश तिवारी के पास थी।

पुलिस उपायुक्त अंकित मित्तल के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और अन्य डिजिटल विज्ञापन नेटवर्क पर पेड विज्ञापन चलाकर अपने फर्जी पोर्टल को प्रमोट करते थे। जब कोई उपयोगकर्ता केदारनाथ या वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर बुकिंग सर्च करता था, तो उसे यह फर्जी वेबसाइट दिखाई देती थी और वह ठगी का शिकार हो जाता था।

भुगतान प्राप्त होने के बाद आरोपी पीड़ितों से फोन, व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिए संपर्क में रहते थे। जांच में यह भी सामने आया कि वे रजिस्ट्रेशन फीस, वेरिफिकेशन चार्ज, बीमा शुल्क और रिफंड प्रक्रिया के नाम पर अतिरिक्त पैसे भी वसूलते थे।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी फर्जी ई-टिकट भी तैयार कर भेज देते थे, जिससे पीड़ितों को शुरुआत में विश्वास हो जाता था कि उनकी बुकिंग हो चुकी है। बाद में जब असली हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाताओं के रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं मिलता था, तब ठगी का पता चलता था।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अरविंद कुमार की निगरानी में इंस्पेक्टर हंसराज स्वामी की टीम ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह 12 राज्यों में सक्रिय था और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के श्रद्धालु इसके शिकार बने हैं।

पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क है, जो धार्मिक यात्राओं की बढ़ती मांग और सीमित टिकट उपलब्धता का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाता था।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक आईपैड, कई एटीएम कार्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचाने की कोशिश की जाती थी।

पुलिस ने शिकायतकर्ता के ₹20,328 की राशि को फ्रीज कर दिया है। मास्टरमाइंड श्रेयांश तिवारी को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य दो आरोपियों को बिहार से पकड़ा गया।

पुलिस ने श्रद्धालुओं को चेतावनी दी है कि वे किसी भी हेलीकॉप्टर या यात्रा बुकिंग के लिए केवल अधिकृत वेबसाइटों का ही उपयोग करें, सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें और भुगतान से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता जरूर जांचें।

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