केरल में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ते नए पैटर्न को देखते हुए Kerala Police ने राज्यभर में हाई अलर्ट जारी किया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart के नाम का दुरुपयोग कर ‘GOAT सेल’ के नाम से फर्जी विज्ञापन सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य आम लोगों से ऑनलाइन भुगतान कराना और बाद में धोखाधड़ी करना है।
पुलिस के अनुसार ठगों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे पेज बनाए हैं जो असली कंपनियों के आधिकारिक पेज जैसे दिखते हैं। इन पेजों पर “Flipkart GOAT SALE”, “Goat Sale Live”, “Offers Sale” और “FK Goats Offer’s” जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।
इन फर्जी पेजों पर मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर दिखाया जाता है। सीमित समय और भारी छूट का झांसा देकर लोगों को जल्द भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है।
जैसे ही कोई उपयोगकर्ता इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है, उसे या तो नकली वेबसाइट पर भेज दिया जाता है या फिर व्हाट्सऐप नंबर से जोड़ दिया जाता है, जहां ठग खुद को सेल प्रतिनिधि बताकर एडवांस पेमेंट, बुकिंग चार्ज और डिलीवरी फीस के नाम पर पैसे मांगते हैं।
पुलिस ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति पर काम करता है, जिसमें “लिमिटेड स्टॉक” और “ऑफर जल्द खत्म हो जाएगा” जैसे संदेश भेजकर उपभोक्ताओं को तुरंत भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
एक बार भुगतान हो जाने के बाद न तो उत्पाद डिलीवर किया जाता है और न ही पैसे वापस मिलते हैं। कई मामलों में पीड़ितों से अतिरिक्त रकम की मांग की जाती है और बाद में संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है और इसके पीछे संगठित साइबर गिरोह सक्रिय हैं, जो सोशल मीडिया विज्ञापनों, नकली वेबसाइटों और फर्जी बैंक खातों का उपयोग करते हैं।
Kerala के नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट के माध्यम से ही खरीदारी करें। किसी भी सोशल मीडिया ऑफर को बिना सत्यापन के स्वीकार न करें।
इसके अलावा लोगों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी अज्ञात बैंक खाते या यूपीआई आईडी पर पैसे न भेजें और ओटीपी, कार्ड डिटेल्स, सीवीवी और पिन जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी कमजोरी उपभोक्ताओं की जल्दबाजी और अत्यधिक छूट के लालच में बिना सत्यापन भुगतान कर देना होती है। ठग अक्सर त्योहारी सीजन या बड़ी सेल अवधि का नाम लेकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं और फर्जी ट्रैकिंग लिंक व नकली कस्टमर सपोर्ट का इस्तेमाल कर पीड़ितों को भ्रमित करते हैं।
इस पूरे मामले पर साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे ठगी नेटवर्क अब पूरी तरह “सोशल इंजीनियरिंग आधारित फ्रॉड मॉडल” पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, “साइबर अपराधी अब तकनीक से ज्यादा मानव व्यवहार को निशाना बना रहे हैं। लिमिटेड ऑफर, डिस्काउंट और तात्कालिकता का दबाव बनाकर लोगों से सोचने का समय छीन लिया जाता है, जो इस तरह की ठगी की सबसे बड़ी वजह बनता है।”
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि डिजिटल भुगतान करते समय हमेशा आधिकारिक प्लेटफॉर्म की पुष्टि करना आवश्यक है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना या व्यक्तिगत जानकारी साझा करना गंभीर वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध विज्ञापन को तुरंत रिपोर्ट करें और अपने आसपास के लोगों को भी ऐसे साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी अनजान ऑफर पर भरोसा करने से पहले दो बार सत्यापन करने की आदत ही भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान को रोक सकती है।
