गोरखपुर: ‘एफ बार बाय फैशन टीवी’ नामक फ्रेंचाइजी दिलाने के बहाने देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी काशिफ खान उर्फ काशीफ सरदार हाशिम खान मलिक, ऑपरेशन हेड कृष्णा देवी और वित्त नियंत्रक नवीन आहूजा उर्फ नवीन सर आहूजा शामिल हैं। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस गोरखपुर ला रही है। इस मामले में पहले ही एक आरोपी वैभव मणि त्रिपाठी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक महिला कर्मचारी की तलाश अभी जारी है।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता जूही सिंह, जो कि पार्क हॉस्पिटैलिटी नामक फर्म संचालित करती हैं, ने आरोप लगाया कि वैभव त्रिपाठी और करुणेश प्रताप शाही अंशधारक होने के नाते उन्हें फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देते थे। जूही और उनके पति राकेश सिंह ने भरोसा करके नकद और बैंक ट्रांजेक्शन के माध्यम से लगभग एक करोड़ रुपये आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
अधिकारियों ने बताया कि रकम फ्रेंचाइजी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेटअप के नाम पर ली गई थी, लेकिन न तो वास्तविक फ्रेंचाइजी प्रदान की गई और न ही किसी वैध अनुबंध का पालन हुआ। बाद में फैशन टीवी प्राइवेट लिमिटेड से संपर्क करने पर कंपनी ने किसी भी अनुबंध से इनकार कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि एग्रीमेंट पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे, जिसकी पुष्टि हैंड राइटिंग रिपोर्ट से हुई।
आरोपी उद्यमियों को झांसा देकर फैशन टीवी ब्रांडेड बार, लाउंज, कैफे और सैलून की फ्रेंचाइजी दिलाने का दावा करते थे। उन्हें मुंबई के सांताक्रूज दफ्तर बुलाकर ₹12.50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक वसूलते थे। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर उन्हें सौंपा और राशि जमा करने के लिए एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और फेडरल बैंक की विले पार्ले शाखा में निर्देशित किया।
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इस मामले में SIT ने बताया कि मुख्य आरोपी काशिफ खान ने खुद को कंपनी का प्रबंध निदेशक बताया, जबकि कृष्णा देवी और नवीन आहूजा क्रमशः ऑपरेशन हेड और वित्त नियंत्रक के रूप में काम कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ से पूरे नेटवर्क की तह तक खुलासा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के फ्रेंचाइजी घोटालों में उद्यमियों की सतर्कता और डिजिटल ट्रैकिंग दोनों आवश्यक हैं। फर्जी दस्तावेज़ और अनुबंधों की जांच के लिए तकनीकी ऑडिट और डिजिटल फाइनेंशियल मॉनिटरिंग बेहद महत्वपूर्ण है।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसे जालसाज़ कानूनी प्रावधानों के तहत सजा के पात्र हैं और राज्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी की जांच में प्रशासन पहले से अधिक सतर्क और सक्रिय हो गया है।
राज्य में इस प्रकार के फ्रेंचाइजी और निवेश झांसे को रोकने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों ने सख्त निगरानी और तकनीकी जांच के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह मामला न केवल गोरखपुर बल्कि लखनऊ, मुंबई, पटियाला, बडोदरा, उदयपुर, ग्वालियर, पणजी और जयपुर जैसे शहरों में भी दर्ज मुकदमों की जाँच को गति देगा।
आरोपियों की गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड से यह संदेश गया कि फर्जी फ्रेंचाइजी और कागजी लेन-देन के माध्यम से किए गए निवेश धोखाधड़ी के मामले गंभीर हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे मामलों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
