वर्ष 2008-09 में 27 कथित गैर-मौजूद स्कूलों के जरिए छात्र संख्या बढ़ाकर अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने का आरोप; फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन के गबन की जांच तेज।

फर्जी स्कूलों के नाम पर ₹1 करोड़ छात्रवृत्ति घोटाले में बड़ी कार्रवाई, EOW ने पूर्व स्कूल प्रबंधक को किया गिरफ्तार

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By Roopa
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लखनऊ/इटावा: उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने लगभग ₹1 करोड़ के कथित छात्रवृत्ति घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पूर्व स्कूल प्रबंधक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2008-09 के शैक्षणिक सत्र में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अस्तित्वहीन विद्यालय के नाम पर छात्रों की छात्रवृत्ति प्राप्त की और सरकारी धन का गबन किया। यह मामला अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यक तथा सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति निधि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।

EOW के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान लाल सिंह के रूप में हुई है, जिसे इटावा के फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। आरोपी लंबे समय से इस मामले में जांच के दायरे में था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच एजेंसी के मुताबिक यह कथित घोटाला वर्ष 2008-09 के दौरान सामने आया था। आरोप है कि इटावा जिले में 27 गैर-मौजूद विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों की संख्या को फर्जी तरीके से बढ़ाकर छात्रवृत्ति की राशि का दावा किया। बाद में यह धन कथित रूप से वास्तविक विद्यार्थियों तक पहुंचने के बजाय आरोपियों द्वारा गबन कर लिया गया।

मामले में वर्ष 2009 में इटावा के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर संख्या 673/2009 दर्ज की गई थी। प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी से संबंधित अपराध), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 204 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई। बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के कानपुर सेक्टर को सौंप दी गई।

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EOW की जांच में आरोप है कि लाल सिंह इटावा के माणिकपुर मोड़ स्थित कथित संत बी.डी.एस. पब्लिक स्कूल का प्रबंधक था, जबकि जांच में विद्यालय का वास्तविक अस्तित्व संदिग्ध पाया गया। एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने फर्जी छात्रवृत्ति मांग पत्र, जाली अभिलेख और काल्पनिक विद्यार्थियों का विवरण तैयार कर छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त की। जांच के अनुसार, जिन छात्रों के नाम पर धन निकाला गया, उनमें से कई का वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला।

जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार यह जांच की जा रही है कि फर्जी विद्यालयों के संचालन, दस्तावेज तैयार करने, छात्र संख्या बढ़ाने और छात्रवृत्ति राशि के वितरण में किन-किन लोगों की संलिप्तता थी। संबंधित बैंक खातों, शैक्षणिक अभिलेखों, वित्तीय लेनदेन और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है ताकि गबन की पूरी श्रृंखला का खुलासा किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि मामले में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों, विद्यालय संचालकों या सरकारी तंत्र से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कथित रूप से गबन की गई सरकारी राशि की वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लाभार्थियों की पहचान का भी प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रवृत्ति योजनाओं में फर्जी नामांकन, काल्पनिक विद्यार्थियों और जाली दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी धन की हेराफेरी गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल, शिक्षा विभाग के अभिलेख और लाभार्थी सत्यापन के माध्यम से पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है। आर्थिक अपराध शाखा ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारी तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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