लुधियाना में GLADA की शिकायत पर फर्जी भुगतान रसीदों और जाली दस्तावेजों से संपत्ति हस्तांतरण कराने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।

मंडी शुल्क चोरी मामले में तीन फर्मों पर कार्रवाई, लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू

Team The420
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एटा (उत्तर प्रदेश): मंडी शुल्क चोरी और कथित राजस्व अपवंचन के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने मामले में तीन फर्मों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके यूनिफाइड लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एटा से मक्का की 16 रैक भेजी गई थीं, लेकिन दस्तावेजों में केवल 11 रैक का ही विवरण दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां अब इस अंतर की पड़ताल कर रही हैं कि शेष पांच रैक कहां से लोड की गईं और उनके परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित विसंगति कैसे आई।

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जांच के आधार पर प्रशासन ने तीन फर्मों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इनमें मैसर्स विवेक एंटरप्राइजेज, मैसर्स मां शारदा ट्रेडिंग कंपनी और मैसर्स श्याम जी ट्रेडर्स शामिल हैं। आरोप है कि इन फर्मों द्वारा बिना मंडी शुल्क जमा किए और बिना आवश्यक गेटपास के रेलवे माध्यम से मक्का का परिवहन किया गया।

प्रशासन के अनुसार, संबंधित फर्मों के यूनिफाइड लाइसेंस को निलंबित करने के लिए संबंधित मंडी समितियों को पत्र भेजा गया है। लाइसेंस निलंबित होने के बाद ये फर्में उत्तर प्रदेश की अन्य मंडियों में भी कारोबार नहीं कर सकेंगी। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और राजस्व चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाना है।

जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने कहा कि मंडी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और सरकारी राजस्व की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच एक वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति, व्यापारी या फर्म की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन अब परिवहन दस्तावेज, मंडी रिकॉर्ड, गेटपास, भुगतान विवरण और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कथित रूप से रैक की संख्या में अंतर कैसे आया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।

व्यापारिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी शुल्क चोरी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी जरूरी है। उनका मानना है कि ऐसी कार्रवाई से नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को भी लाभ मिलेगा।

हालांकि, मामले में कुछ स्तरों पर अधिकारियों की संभावित भूमिका और दबाव को लेकर चर्चाएं भी सामने आई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाएगी और केवल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

फिलहाल जिला प्रशासन की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि मंडी शुल्क चोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

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