न्यूयॉर्क (अमेरिका): मेक्सिको के कुख्यात सिनालोआ ड्रग कार्टेल के सह-संस्थापक इस्माइल “एल मायो” जांबादा को अमेरिका की अदालत सोमवार को उम्रकैद की सजा सुनाने जा रही है। जांबादा ने पिछले वर्ष ड्रग तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उसे मृत्युदंड से राहत मिली थी लेकिन उम्रकैद की सजा लगभग तय हो गई।
ब्रुकलिन स्थित संघीय अदालत में होने वाली यह सुनवाई अमेरिका की ओर से वर्षों तक चले उस अभियान का महत्वपूर्ण चरण है, जिसका उद्देश्य सिनालोआ कार्टेल के लंबे समय से फरार रहे प्रमुख संचालक को कानून के शिकंजे में लाना था। जांबादा को वर्ष 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उसके वकील के अनुसार, उसे मेक्सिको में अगवा कर जबरन अमेरिका लाया गया था।
दुनिया के सबसे बड़े ड्रग नेटवर्क के संचालन का आरोप
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि जांबादा और उसके सहयोगी जोआक्विन “एल चापो” गुजमान ने मिलकर सिनालोआ कार्टेल को दुनिया के सबसे बड़े मादक पदार्थ तस्करी संगठनों में बदल दिया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांबादा ने कथित रूप से यातना, हत्याओं की साजिश और हिंसक गतिविधियों का आदेश दिया। उसके नेतृत्व वाले नेटवर्क पर अमेरिका में बड़ी मात्रा में कोकीन, फेंटेनाइल, मेथामफेटामाइन और अन्य प्रतिबंधित पदार्थ पहुंचाने का आरोप है।
जहां एल चापो को संगठन का अधिक चर्चित चेहरा माना जाता था, वहीं जांबादा को कार्टेल का रणनीतिकार और समझौते कराने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया गया। एल चापो को वर्ष 2019 में दोषी ठहराया गया था और वह अमेरिका की सुपरमैक्स जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
अपराध स्वीकार करने के बाद सजा का रास्ता साफ
जांबादा ने अगस्त 2025 में आरोप स्वीकार किए थे। अभियोजन पक्ष द्वारा मृत्युदंड की मांग नहीं करने के फैसले के बाद उसने अदालत में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी।
76 वर्षीय जांबादा ने अदालत से अनुरोध किया है कि उसे जेल अस्पताल में रखा जाए। उसके वकील फ्रैंक पेरेज ने कहा कि जांबादा उम्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है और उसे लगातार चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता होगी।
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने अदालत से उसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाली जेल की सिफारिश करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांबादा अभी भी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
15 अरब डॉलर आर्थिक दंड की मांग
अमेरिकी अभियोजकों ने जांबादा पर लगभग 15 अरब डॉलर का आर्थिक दंड लगाने की मांग की है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह राशि उसके नेतृत्व में कार्टेल द्वारा अर्जित कथित अवैध कमाई को दर्शाती है।
जांबादा ने आपराधिक संगठन चलाने और रैकेटियरिंग साजिश से जुड़े आरोपों में दोष स्वीकार किया है। उसने 85 अलग-अलग अपराधों के लिए जिम्मेदारी स्वीकार की है।
उसने अदालत में कहा था कि वर्ष 1980 से लेकर गिरफ्तारी तक उसके संगठन ने कम से कम 15 लाख किलोग्राम कोकीन की तस्करी की, जिसका बड़ा हिस्सा अमेरिका भेजा गया।
भ्रष्टाचार और हिंसा का नेटवर्क
जांबादा ने स्वीकार किया कि सिनालोआ कार्टेल ने कोलंबिया के ड्रग उत्पादकों से संबंध बनाए, समुद्री और हवाई मार्गों से नशीले पदार्थों को मेक्सिको पहुंचाया और फिर अमेरिका-मेक्सिको सीमा के जरिए उनकी तस्करी की।
उसने यह भी माना कि कार्टेल हर साल करोड़ों डॉलर की कमाई करता था और संगठन से जुड़े लोग मैक्सिको के अधिकारियों को भारी रिश्वत देते थे ताकि अवैध गतिविधियां जारी रह सकें।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी से पहले जांबादा ने अपने भतीजे एलिसियो इम्पीरियल कास्त्रो उर्फ “चेयो एन्ट्रैक्स” की हत्या का आदेश दिया था। इसके अलावा वर्ष 2023 में फेंटेनाइल गोलियों, मेथामफेटामाइन और कोकीन की बड़ी खेप चोरी होने के बाद हुई हिंसा में भी उसकी भूमिका बताई गई है।
गिरफ्तारी के बाद सिनालोआ में हिंसा
जांबादा की गिरफ्तारी के बाद सिनालोआ क्षेत्र में उसके समर्थकों और एल चापो के बेटों से जुड़े गुटों के बीच हिंसक संघर्ष शुरू हो गया था। एल चापो के बेटों को “लिटिल चापोज” के नाम से जाना जाता है।
जांबादा के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसने मुकदमे से बचने के लिए अपराध स्वीकार कर जांच में सहयोग किया, इसलिए उसे एल चापो जैसी सजा और उसी सुपरमैक्स जेल में भेजना उचित नहीं होगा।
हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि जांबादा के अपराधों का पैमाना इतना बड़ा है कि उम्रकैद की सजा ही उचित दंड है। अदालत का फैसला अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
