क्रिप्टो फ्रॉड और साइबर हैकिंग नेटवर्क से जुड़े केस में 12 ठिकानों पर छापेमारी, Sriki लिंक की गहन जांच जारी

₹150 करोड़ FD घोटाले में बड़ा एक्शन: Enforcement Directorate ने PMLA जांच शुरू की, बैंकिंग गड़बड़ियों पर सख्त नजर

Roopa
By Roopa
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चंडीगढ़/पंचकूला: बैंकिंग सेक्टर से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले में Enforcement Directorate (ED) ने ₹150 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) फ्रॉड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी है। यह मामला Kotak Mahindra Bank की पंचकूला शाखा से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां नगर निगम की जमा राशि में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह केस Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नगर निगम के फंड्स को कथित तौर पर अनधिकृत तरीकों से डायवर्ट किया गया और बाद में कई ट्रांजैक्शनों के जरिए लेयरिंग कर उनकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक बैंक या एक शाखा तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि चंडीगढ़-हरियाणा क्षेत्र में फैले व्यापक वित्तीय अनियमितताओं के नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी संदर्भ में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े कुछ संदिग्ध लेनदेन भी जांच के दायरे में लाए गए हैं।

इस मामले का केंद्र नगर निगम की वह राशि है, जिसे सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में बैंक में रखा गया था। लेकिन शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन जमा राशियों में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया और पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि फंड्स को जानबूझकर डायवर्ट कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों और बाहरी संस्थाओं के बीच कोई मिलीभगत थी। यदि ऐसा सामने आता है, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि इससे संस्थागत स्तर पर लापरवाही या सुनियोजित धोखाधड़ी का संकेत मिलेगा।

फिलहाल जांच का मुख्य फोकस फंड फ्लो को ट्रेस करना, अंतिम लाभार्थियों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या इन ट्रांजैक्शनों को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि उनकी असली प्रकृति छुपाई जा सके। इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और संबंधित खातों की गहन जांच की जा रही है।

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इस बीच, Kotak Mahindra Bank ने बयान जारी कर कहा है कि वह इस मामले की आंतरिक समीक्षा कर रहा है और पंचकूला नगर निगम के निर्देशों के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह सरकारी एजेंसियों और जांच अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से बैंकिंग सिस्टम में निगरानी और नियंत्रण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सार्वजनिक धन के प्रबंधन में किसी भी तरह की चूक बड़े वित्तीय जोखिम का कारण बन सकती है और इससे लोगों का भरोसा भी प्रभावित होता है।

PMLA के तहत केस दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियां आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज कर सकती हैं। इसमें संदिग्ध खातों को फ्रीज करना, संबंधित लोगों से पूछताछ करना और पूरे नेटवर्क की पहचान करना शामिल हो सकता है।

अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस तरह के पैटर्न अन्य राज्यों या क्षेत्रों में भी हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह एक बड़े संगठित वित्तीय नेटवर्क का खुलासा कर सकता है।

यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि वित्तीय प्रणाली में छोटी सी चूक भी बड़े घोटाले का रूप ले सकती है। फिलहाल एजेंसियां इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं और आने वाले समय में इससे जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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