तेलंगाना में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों के आधार पर शुरू हुई जांच; ऑनलाइन रियल-मनी रम्मी प्लेटफॉर्म पर बॉट्स, भ्रामक ऑफर और भारी कमीशन के जरिए खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप, ₹2,401 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज

₹19,984 करोड़ ऑनलाइन रम्मी मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ED ने Gameskraft, RummyTime समेत निदेशकों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की

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By Roopa
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बेंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन रियल-मनी रम्मी प्लेटफॉर्म से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज, रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, उनके संस्थापकों, निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ बेंगलुरु की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। शिकायत में विकास तनेजा, पृथ्वी राज सिंह और दीपक सिंह अहलावत सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया है।

ईडी के अनुसार यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें ऑनलाइन रियल-मनी रम्मी प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों पर खिलाड़ियों के साथ कथित धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर वित्तीय लेनदेन और प्लेटफॉर्म के संचालन की विस्तृत पड़ताल की गई।

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि संबंधित कंपनियां RummyCulture, RummyPrime, Playship Rummy और RummyTime जैसे ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म संचालित करती थीं। इन प्लेटफॉर्म पर खिलाड़ियों द्वारा लगाई जाने वाली दांव राशि पर 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान कई ऐसी प्रक्रियाएं सामने आईं, जिनसे खिलाड़ियों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया।

एजेंसी के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि RummyCulture प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर बॉट्स यानी स्वचालित कंप्यूटर प्रोग्राम या एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता था, जो वास्तविक खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते थे। ईडी का आरोप है कि इससे खिलाड़ियों को यह आभास होता था कि वे अन्य वास्तविक प्रतिभागियों के साथ खेल रहे हैं, जबकि वास्तविकता अलग हो सकती थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रकार की व्यवस्था से खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ जाती थी।

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ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियों ने नए और मौजूदा खिलाड़ियों को आकर्षित करने के लिए बोनस, रेफरल इंसेंटिव, “इंस्टेंट कैश” रिवार्ड और अन्य प्रचार योजनाओं का व्यापक इस्तेमाल किया। एजेंसी का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को लगातार गेम खेलने और अधिक धनराशि दांव पर लगाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके साथ ही निकासी (Withdrawal) पर विभिन्न प्रकार की पाबंदियां और शुल्क लगाए जाते थे, जिससे उपयोगकर्ताओं को अपनी राशि निकालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

जांच एजेंसी का दावा है कि इन कथित तौर पर भ्रामक व्यावसायिक तरीकों के कारण बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को भारी वित्तीय नुकसान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। ईडी के अनुसार अब तक की जांच में कथित अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का अनुमान लगभग ₹19,984 करोड़ लगाया गया है। एजेंसी का कहना है कि यह राशि विभिन्न वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर सामने आई है।

मामले की जांच के दौरान ईडी ने आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की कथित अपराध से संबंधित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। एजेंसी के अनुसार अब तक लगभग ₹2,401 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। इनमें विभिन्न प्रकार की चल और अचल संपत्तियों के साथ वित्तीय परिसंपत्तियां भी शामिल हैं, जिनकी जांच अभी जारी है।

ईडी ने विशेष अदालत के समक्ष दाखिल अभियोजन शिकायत में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और जांच के दौरान जुटाई गई अन्य सामग्री प्रस्तुत की है। अदालत अब शिकायत पर संज्ञान लेने, आरोपियों को समन जारी करने और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने पर निर्णय करेगी। दूसरी ओर, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकलेगा। यह मामला ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता, उपभोक्ता सुरक्षा और वित्तीय अनुपालन को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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