नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्वयंभू बाबा अशोक खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। अशोक खरात, जो कथित तौर पर ‘कैप्टन’ और ‘बंधु बाबा’ के नाम से भी जाना जाता था, को 19 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
ED के अनुसार, जांच के दौरान अब तक लगभग ₹37 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। इनमें करीब ₹19 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां तथा लगभग ₹18 करोड़ मूल्य की अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों में बैंक लॉकर, वाहन और अन्य संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें अप्रैल और मई के दौरान अशोक खरात तथा उसके सहयोगियों से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी में जब्त किया गया था।
यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच महाराष्ट्र के सरकारवाड़ा, शिरडी, सिन्नर और राहाता पुलिस थानों में दर्ज कई प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर शुरू की गई थी। ED का आरोप है कि अशोक खरात ने श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए विशेष पूजा-पाठ, बीमारियों के इलाज, दुर्भाग्य दूर करने और कारोबार में सफलता दिलाने का झांसा देकर उनसे धन और संपत्तियां हासिल कीं। जांच एजेंसी के अनुसार, यह गतिविधियां कथित रूप से धोखाधड़ी, उगाही और आपराधिक धमकी जैसे अपराधों से जुड़ी हैं।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि अशोक खरात ने स्वयं को भगवान शिव का अवतार बताकर अनुयायियों का विश्वास जीता और उसी आधार पर कथित अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया। ED के अनुसार, इस कथित अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए विभिन्न वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कथित अपराध से प्राप्त धनराशि को दो सहकारी ऋण समितियों के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी का दावा है कि एक कर्मचारी की कथित मदद से कई बैंक खातों का संचालन किया गया, जिनके जरिए धन के लेनदेन को अंजाम दिया गया। इसके अलावा, बेनामी खातों में बड़ी नकद जमा और निकासी के माध्यम से धन के प्रवाह को छिपाने का भी आरोप लगाया गया है।
ED के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से अर्जित धन का उपयोग नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में परिवार के सदस्यों तथा करीबी सहयोगियों के नाम पर संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। एजेंसी अब इन वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों के स्वामित्व की विस्तृत जांच कर रही है।
अशोक खरात को इससे पहले 18 मार्च को नासिक पुलिस ने एक विवाहित महिला की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने कथित तौर पर तीन वर्षों तक उसके साथ दुष्कर्म किया। उस मामले की जांच राज्य पुलिस द्वारा अलग से की जा रही है।
ED ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच अभी जारी है और चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों के अलावा यदि आगे कोई नया वित्तीय या दस्तावेजी प्रमाण सामने आता है, तो मामले में अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी कथित अपराध से अर्जित धन के स्रोत, उसके उपयोग और पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
