महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दुबई में करीब ₹1,700 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई उस कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ की गई है, जिसका संचालन विदेशों से किया जा रहा था और जिसके तार भारत के कई राज्यों तक फैले बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियां मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर खरीदी गई थीं।
जांच में सामने आया है कि जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, वे दुबई के सबसे प्रीमियम इलाकों में स्थित हैं। इनमें लग्जरी विला, हाई-एंड अपार्टमेंट और प्रतिष्ठित रिहायशी प्रोजेक्ट्स में निवेश शामिल है। दुबई हिल्स एस्टेट, बिजनेस बे और SLS होटल एंड रेजिडेंस जैसे पॉश इलाकों में स्थित प्रॉपर्टीज के अलावा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत Burj Khalifa में मौजूद फ्लैट भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों को खरीदने के लिए जिस धन का इस्तेमाल किया गया, वह अवैध सट्टेबाजी से अर्जित किया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने हजारों म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर पैसे को घुमाया और उसे वैध निवेश के रूप में दिखाते हुए विदेशी संपत्तियों में लगाया। इस प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।
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महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप को वर्ष 2018 में लॉन्च किया गया था और कुछ ही वर्षों में यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के रूप में विकसित हो गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अपने चरम पर यह प्लेटफॉर्म रोजाना करीब ₹200 करोड़ तक का अवैध कारोबार करता था। यह नेटवर्क 3,000 से अधिक पैनलों के जरिए संचालित होता था, जबकि इसके कॉल सेंटर यूएई, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों में सक्रिय थे। पूरे घोटाले का आकार करीब ₹6,000 करोड़ तक आंका गया है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सौरभ चंद्राकर और उसका सहयोगी रवि उप्पल इस पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई से कर रहे थे। इनके अलावा विकास छपरिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी जैसे नाम भी इस नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोप है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंचाया गया, जिससे नेटवर्क को संरक्षण मिल सके।
सौरभ चंद्राकर को अक्टूबर 2024 में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर दुबई में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल उसका प्रत्यर्पण मामला वहां की अदालत में लंबित है। वहीं रवि उप्पल को भी पहले हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में वह फरार हो गया। माना जा रहा है कि वह वानुअतु में छिपा हो सकता है, जहां भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है।
इस मामले में जांच एजेंसी अब तक पांच चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही, विदेशी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच जारी है, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक निर्णायक कदम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क को खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन हालिया कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि एजेंसियां अब इस तरह के संगठित अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं।
फिलहाल, जांच एजेंसियां इस केस में जुड़े अन्य लोगों, कंपनियों और संपत्तियों की पहचान करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह नेटवर्क कितना व्यापक था और इसके जरिए कितनी बड़ी मात्रा में अवैध धन का लेनदेन किया गया।
