क्रिस्टी किनाहन का यूएई रेजिडेंस वीजा 31 अगस्त को रद्द हुआ, 29 सितंबर तक देश छोड़ने का आदेश; फर्जी नाम से गूगल रिव्यू और ऑनलाइन गतिविधियों से जांचकर्ताओं को मिले उसके ठिकाने के सुराग

दुबई में छिपकर चला रहा था ड्रग साम्राज्य, डिजिटल फुटप्रिंट से खुला ‘डैपर डॉन’ का ठिकाना

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By Roopa
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दुबई/वाशिंगटन। यूरोप के कुख्यात ड्रग नेटवर्क के सरगना क्रिस्टी किनाहन के लिए दुबई में करीब एक दशक से बना सुरक्षित ठिकाना अब खत्म होने की स्थिति में है। ‘द डैपर डॉन’ के नाम से पहचाने जाने वाले 69 वर्षीय किनाहन वर्ष 2016 में दुबई पहुंचा था और वहां से अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को संचालित करने के आरोपों के बीच लंबे समय तक जांच एजेंसियों की नजर से दूर रहा। अब संयुक्त अरब अमीरात ने उसका रेजिडेंस वीजा रद्द कर दिया है और सरकारी आव्रजन रिकॉर्ड में उसे 29 सितंबर तक देश छोड़ने की समयसीमा दी गई है।

किनाहन अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है और उसकी गिरफ्तारी या दोषसिद्धि तक पहुंचाने वाली सूचना के लिए अमेरिकी सरकार ने 50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा कर रखी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, किनाहन को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन के प्रमुख के रूप में नामित किया गया है। उसके नेटवर्क पर मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और धन शोधन जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।

2016 में दुबई बना ठिकाना

किनाहन वर्ष 2016 में यूरोप में पुलिस और जांच एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई के बाद दुबई पहुंचा था। इसके बाद दुबई को उसके नेटवर्क का प्रमुख ठिकाना माना जाने लगा। हालिया जांच के मुताबिक उसका रोजगार आधारित रेजिडेंस वीजा अप्रैल में समाप्त हो गया था। इसके बाद यूएई के सरकारी आव्रजन पोर्टल के रिकॉर्ड में वीजा की स्थिति 31 अगस्त को ‘रद्द’ दिखाई गई। सरकारी रिकॉर्ड में उसके लिए 29 सितंबर अंतिम प्रस्थान तिथि दर्ज है। वीजा रद्द होने की सामान्य स्थिति में रोजगार आधारित रेजिडेंस वीजा धारक को निर्धारित अवधि के भीतर देश छोड़ना होता है।

हालांकि वीजा रद्द करने का विशेष कारण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट नहीं है। जांच में यह भी सामने आया है कि किनाहन अभी दुबई में हो सकता है, जबकि उसके दूसरे देश में चले जाने की अटकलें भी लगती रही हैं। यूरोपीय खुफिया एजेंसियां उसकी संभावित गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

ऑनलाइन रिव्यू बने सबसे अहम सुराग

किनाहन को लंबे समय तक पकड़ से बाहर रखने वाली पहचान के बावजूद उसकी डिजिटल गतिविधियों ने जांचकर्ताओं को महत्वपूर्ण सुराग दिए। उसने कथित तौर पर ‘क्रिस्टोफर विंसेंट’ नाम का इस्तेमाल करते हुए गूगल पर होटल, रेस्तरां और दूसरे प्रतिष्ठानों के बारे में रिव्यू लिखे। इन रिव्यू में दर्ज स्थानों और तस्वीरों से उसके आवागमन का अनुमान लगाने में मदद मिली।

जांच में पाया गया कि इस ऑनलाइन प्रोफाइल से संयुक्त अरब अमीरात में 100 से अधिक रिव्यू जुड़े थे। इसके अलावा स्पेन, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की समेत कई देशों के प्रतिष्ठानों के रिव्यू भी इसी नाम से पोस्ट किए गए थे। प्रोफाइल से एक हजार से अधिक तस्वीरें और कई वीडियो भी जुड़े थे। इनमें कुछ तस्वीरों और प्रतिबिंबों ने उसके संभावित स्थान और गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त संकेत दिए।

जांचकर्ताओं ने पुराने ऑनलाइन रिकॉर्ड और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर इस प्रोफाइल को किनाहन से जोड़ने वाले सुराग भी तलाशे। एक पुराने वेबसाइट रिकॉर्ड और उससे जुड़े ईमेल विवरण की जांच के बाद गूगल रिव्यू प्रोफाइल तक पहुंचने का रास्ता मिला। डोमेन के पुराने पंजीकरण रिकॉर्ड में ‘क्रिस्टोफर विंसेंट किनाहन’ नाम भी दर्ज मिला था।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

रिव्यू में छिपी थी आवाजाही की जानकारी

ऑनलाइन रिव्यू केवल खाने या होटल की पसंद तक सीमित नहीं थे। कुछ पोस्ट में तस्वीरें, स्थान और यात्रा से जुड़े विवरण भी थे। जांचकर्ताओं ने इन्हें किनाहन की संभावित आवाजाही से जोड़कर देखा। दुबई के एक रेस्तरां से जुड़े रिव्यू और बाद में वहां की तस्वीरों में दिखाई देने वाले लोगों ने भी जांच को अतिरिक्त संकेत दिए।

इस तरह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डिजिटल गतिविधियों ने यह दिखाया कि किसी व्यक्ति की पहचान छिपी होने के बावजूद उसके ऑनलाइन व्यवहार, तस्वीरें, स्थान और पुराने रिकॉर्ड एक-दूसरे से जुड़कर उसकी गतिविधियों का पैटर्न सामने ला सकते हैं।

किनाहन कार्टेल का बड़ा नेटवर्क

किनाहन ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप को लंबे समय से यूरोप के बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों में शामिल बताया जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क पर कोकीन और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की अवैध आपूर्ति और धन शोधन में शामिल होने के आरोप हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने 2022 में किनाहन और उसके दो बेटों को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था।

किनाहन के दोनों बेटों का नाम भी इस नेटवर्क से जुड़ा रहा है। उसके छोटे बेटे क्रिस्टोफर किनाहन जूनियर को नेटवर्क के वित्तीय मामलों से जोड़कर देखा जाता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उसे जुलाई में यूएई में नया दो साल का रेजिडेंस वीजा भी जारी किया गया था, जबकि उसके पिता का वीजा रद्द कर दिया गया।

अब कहां जाएगा ‘डैपर डॉन’?

29 सितंबर की समयसीमा नजदीक आने के साथ सबसे बड़ा सवाल यह है कि किनाहन आगे कहां जाएगा। यूरोपीय खुफिया एजेंसियां उसकी संभावित गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उसके लिए दूसरे देशों में नया सुरक्षित ठिकाना तलाशना आसान नहीं होगा, क्योंकि वह अमेरिकी प्रतिबंधों और इनाम की घोषणा के दायरे में है।

इस बीच, रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि किनाहन नेटवर्क के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ी है और समूह अलग-अलग धड़ों में बंट रहा है। कुछ वरिष्ठ सदस्यों के खिलाफ गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की कार्रवाई भी हुई है। ऐसे माहौल में दुबई से उसका संभावित प्रस्थान उसके लिए केवल ठिकाना बदलने का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही अंतरराष्ट्रीय निगरानी के बीच अगला कदम तय करने की चुनौती भी बन गया है।

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