नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से सक्रिय एक बड़े वाहन चोरी सिंडिकेट के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सरगना अमित नागर और उसके चार कथित सहयोगियों पर MCOCA लगाया गया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले कई वर्षों के दौरान दिल्ली-एनसीआर से 200 से अधिक वाहन चोरी कर उन्हें पूर्वोत्तर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में बेचने और खपाने का नेटवर्क चला रहा था।
बुलंदशहर निवासी अमित नागर के खिलाफ अकेले वाहन चोरी से जुड़े 50 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि वह संगठित तरीके से वाहन चोरी से आर्थिक लाभ कमाता था और चोरी किए गए वाहनों को अलग-अलग राज्यों में सक्रिय अपने संपर्कों के जरिए ठिकाने लगाता था।
सोसायटी अध्यक्ष बनकर छिपा रहा था पहचान
पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस से बचने और अपनी आपराधिक गतिविधियों को छिपाने के उद्देश्य से अमित ने कई वर्ष पहले दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-29 में अपना ठिकाना बनाया था। वहां वह क्रिएटिव हाईट्स आवासीय सोसायटी का अध्यक्ष भी बन गया था। इस सामाजिक पहचान के पीछे वह कथित तौर पर अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित करता रहा और करीब पांच साल तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा।
क्राइम ब्रांच ने हाल में गिरोह से जुड़े प्रमोद नागर, अशरफ सुल्तान, एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान पुलिस को अमित नागर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर यह पता चला कि मामला केवल वाहन चोरी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित अपराध का एक व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत विभिन्न स्थानों पर कई आपराधिक मामले दर्ज मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि अमित नागर केवल पुराने साथियों पर निर्भर नहीं था। वह दिल्ली, मणिपुर, मेरठ, मुरादाबाद और संभल जैसे इलाकों से नए लोगों को कथित तौर पर अपने नेटवर्क में शामिल करता था।
गिरोह कई छोटे-छोटे समूहों में बंटा हुआ था। अलग-अलग समूह वाहन चोरी करने, चोरी के वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और उन्हें दूसरे राज्यों में बेचने या खपाने का काम करते थे। पुलिस का दावा है कि गिरोह के सदस्य वाहन चोरी और उन्हें ठिकाने लगाने के लिए आधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल करते थे।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, अमित का संपर्क देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय छोटे आपराधिक गिरोहों से था। इन संपर्कों के माध्यम से चोरी किए गए वाहनों के लिए खरीदार और सुरक्षित ठिकाने तलाशे जाते थे। वाहनों की बिक्री से होने वाली कथित कमाई का इस्तेमाल नेटवर्क को मजबूत करने और नए सदस्यों को जोड़ने में किया जाता था।
10 वर्षों में कई आरोपपत्र
पुलिस के अनुसार, अमित नागर और उसके सहयोगियों के खिलाफ पिछले करीब 10 वर्षों के दौरान दिल्ली और अन्य राज्यों की अदालतों में एक से अधिक आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। लगातार आपराधिक गतिविधियों और अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने इसे संगठित अपराध का मामला माना।
जांच के दौरान गिरोह के सदस्यों की भूमिका और आपराधिक नेटवर्क की संरचना सामने आने के बाद 10 जुलाई को MCOCA लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसे वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। सरकारी लोक अभियोजक से कानूनी राय लेने के बाद अमित नागर समेत उसके चार कथित सहयोगियों पर MCOCA के तहत कार्रवाई की गई।
आर्थिक लाभ के लिए चला रहे थे नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य वाहन चोरी के जरिए आर्थिक लाभ अर्जित करना था। चोरी किए गए वाहनों को अलग-अलग राज्यों में भेजकर बेचने से होने वाली कमाई से कथित तौर पर आपराधिक नेटवर्क का विस्तार किया जाता था।
MCOCA के तहत कार्रवाई के बाद अब पुलिस गिरोह की संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन, वाहन चोरी से जुड़े अन्य मामलों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने वाहनों को चोरी कर खपाया और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल रहे हैं।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय अंतरराज्यीय वाहन चोरी नेटवर्क पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की आगे की जांच में गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और चोरी के वाहनों की सप्लाई चेन की भी पड़ताल की जाएगी।
