नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के व्यापार एवं कर विभाग (Department of Trade and Taxes) में कथित ₹5.50 करोड़ के जीएसटी रिफंड घोटाले का खुलासा करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने तीन सरकारी अधिकारियों और दो निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों, झूठी सत्यापन रिपोर्टों और विभागीय प्रक्रियाओं की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के जीएसटी रिफंड स्वीकृत किए गए, जिससे सरकारी खजाने को लगभग ₹5.50 करोड़ का नुकसान हुआ। मामले में कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों को भी अदालत के आदेश पर अटैच किया गया है।
एसीबी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में जीएसटी अधिकारी अजीत सिंह, जीएसटी इंस्पेक्टर अटल भारद्वाज, लोअर डिवीजन क्लर्क हिमांशु मलिक तथा निजी व्यक्ति अजय कुमार और आशीष मिश्रा शामिल हैं। मामला व्यापार एवं कर विभाग की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें जीएसटी रिफंड दावों के निस्तारण और स्वीकृति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी।
जांच में सामने आया कि कथित तौर पर वैधानिक प्रावधानों और विभागीय नियमों का पालन किए बिना रिफंड दावों को मंजूरी दी गई। एसीबी का आरोप है कि अनिवार्य सत्यापन, वित्तीय जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेजों, नकली फोटोग्राफ और झूठी निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर बेहद कम समय में करोड़ों रुपये के रिफंड जारी किए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक तत्कालीन जीएसटी अधिकारी ने आवश्यक जांच-पड़ताल किए बिना रिफंड दावों को स्वीकृति दी, जबकि जीएसटी इंस्पेक्टर ने संबंधित व्यावसायिक परिसरों का भौतिक निरीक्षण किए बिना कथित रूप से फर्जी तस्वीरें अपलोड कीं और गलत सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत की। एसीबी का कहना है कि इन कथित अनियमितताओं ने पूरे फर्जी रिफंड नेटवर्क को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वित्तीय जांच के दौरान कथित घोटाले से अर्जित धन की लेयरिंग का भी खुलासा हुआ। एसीबी के अनुसार रकम को कई बैंक खातों और शेल संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित कर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि कथित अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा सरकारी अधिकारी के परिजनों के खातों में भेजा गया और उसी राशि से दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में दो फ्लैट खरीदे गए।
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने बताया कि यह उसका पहला मामला है, जिसमें कथित अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत सक्षम न्यायालय के आदेश पर अटैच किया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस कार्रवाई से कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को सुरक्षित रखने और आगे की कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिलेगी।
जांच अभी जारी है और एजेंसी पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण कर कथित घोटाले की पूरी श्रृंखला तथा शेष धनराशि का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी के मामलों में अक्सर फर्जी कंपनियों, जाली दस्तावेजों, शेल संस्थाओं और बैंक खातों के जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों की जांच में डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग ट्रेल, लाभार्थियों की पहचान और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। समय पर डेटा विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय से इस प्रकार के आर्थिक अपराधों का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया जा सकता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। कानून के अनुसार दोष सिद्ध होने तक सभी गिरफ्तार व्यक्तियों को निर्दोष माना जाएगा।
