गृह मंत्रालय: दिल्ली साइबर फ्रॉड का हॉटस्पॉट, 2021 से दोगुनी घटनाएं। CFCFRMS से ₹8,690 करोड़ रोकी, 21,857 गिरफ्तार। CERT-In: 2025 में 29 लाख मामले।

दिल्ली बना साइबर धोखाधड़ी का हॉटस्पॉट: 2021 से साइबर घटनाएं दोगुनी हुईं

Team The420
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली साइबर धोखाधड़ी का केंद्र बन गई है, जहां 2021 से साइबर अपराध की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। सरकार ने मंगलवार को लोकसभा को जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में साइबर सुरक्षा से जुड़े सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने लिखित उत्तर में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के आंकड़े साझा किए। इनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में साइबर घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है और सबसे अधिक रिपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से दर्ज की गई हैं।

सरकार ने बताया कि साइबर खतरों से निपटने के लिए CERT-In नियमित अलर्ट और सलाह जारी करता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र, साइबर स्वच्छता केंद्र और “साइबर भारत सेतु” जैसी पहल राज्यों और क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का काम कर रही हैं।

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मुख्य आंकड़े और तथ्य

साइबर घटनाएं (वर्षवार):

  • 2021 – 14,02,809
  • 2022 – 13,91,457
  • 2023 – 15,92,917
  • 2024 – 20,41,360
  • 2025 – 29,44,248

शिकायतें और रोकथाम:

नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) के माध्यम से 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी रोकी गई।

प्रमाण पत्र और पंजीकरण:
राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र ने 13,417 से अधिक साइबर अपराध मामलों में सहायता प्रदान की। 1.51 लाख से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने ‘CITRAN’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया और 1.42 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए।

संदिग्ध और गिरफ्तारी:
साइबर अपराध रजिस्ट्री के तहत 23.05 लाख से अधिक संदिग्धों की पहचान साझा की गई, जिससे ₹9,518.91 करोड़ के लेन-देन को रोका गया। समन्वय प्लेटफॉर्म की मदद से 21,857 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

ईडी की जांच:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 28 फरवरी 2026 तक लगभग 257 मामलों की जांच की और ₹35,925.58 करोड़ की अपराध आय की पहचान की।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा न केवल राजधानी में साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि देश में डिजिटल वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।

सरकार ने यह स्पष्ट किया कि राज्यवार डेटा ED द्वारा नहीं रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने और जागरूक करने के लिए लगातार नई पहल और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं।

साथ ही, सरकार ने कहा कि साइबर अपराध के वित्तीय नुकसान का विवरण CERT-In द्वारा संकलित किया जाता है, जिससे वास्तविक आंकड़े जल्दी और प्रभावी कार्रवाई के लिए उपलब्ध रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती डिजिटल निर्भरता और ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन के बढ़ते स्वरूप के चलते ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए निगरानी, शिक्षा और कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

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