नई दिल्ली। एक उपभोक्ता विवाद में दिल्ली के उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए फुजित्सु जनरल इंडिया को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को एसी की पूरी कीमत ₹1.14 लाख ब्याज सहित वापस करे। इसके साथ ही आयोग ने ₹25,000 का मुआवजा और ₹10,000 मुकदमेबाजी खर्च देने का भी निर्देश दिया है। यह मामला एक खराब एयर कंडीशनर और उपभोक्ता सेवा में गंभीर लापरवाही से जुड़ा हुआ है, जिसने उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले के अनुसार, वैभव सिंह भड़ाना ने 17 फरवरी 2025 को एक अधिकृत डीलर के माध्यम से फुजित्सु का 3 टन का स्प्लिट एसी ₹1.14 लाख में खरीदा था। खरीद के समय मौसम ठंडा होने के कारण एसी का सही परीक्षण नहीं हो सका। इंस्टॉलेशन के दौरान कंपनी की ओर से यह बताया गया कि इसे सामान्य दीवार पर लगाना संभव नहीं है, जिसके बाद ग्राहक को अतिरिक्त ₹15,329 खर्च कर एक अलग स्टैंड बनवाना पड़ा।
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समस्या तब सामने आई जब मई 2025 में तापमान बढ़ने पर एसी का उपयोग शुरू किया गया। 11 मई के बाद एसी ने पर्याप्त ठंडक देना बंद कर दिया। इसके बाद 18 से 21 मई के बीच ग्राहक ने कंपनी को लगातार शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें सिर्फ एक ही दिन में कई-कई कॉल शामिल थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, 19 मई को ही 11 बार कॉल की गई, जबकि 18 मई को 5 बार संपर्क किया गया।
ग्राहक की शिकायत के बावजूद कंपनी की ओर से भेजे गए तकनीशियन ने समस्या का समाधान करने के बजाय केवल औपचारिक जांच की। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान यूनिट पर खरोंच और ग्रीस के निशान भी पड़ गए। तकनीशियन ने बाद में बताया कि गैस कम है, लेकिन समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके बाद कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और ग्राहक की शिकायतें अनसुनी रह गईं।
कंपनी की ओर से न तो संतोषजनक मरम्मत की गई और न ही कोई प्रतिस्थापन या रिफंड दिया गया। अंततः उपभोक्ता ने कानूनी नोटिस भेजने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (पूर्व) दिल्ली का दरवाजा खटखटाया। आयोग में कंपनी की ओर से न तो जवाब दाखिल किया गया और न ही कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ, जिसके चलते मामला एकतरफा सुनवाई में चला गया।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा की गई बार-बार की कॉल और शिकायतें इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि उत्पाद में गंभीर तकनीकी खराबी थी। आयोग ने टिप्पणी की कि कंपनी अपने दायित्वों का पालन करने में विफल रही और उपभोक्ता को उचित सेवा प्रदान नहीं की गई, जो ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है।
फैसले में यह भी कहा गया कि चूंकि कंपनी ने न तो जवाब दाखिल किया और न ही सुनवाई में भाग लिया, इसलिए शिकायतकर्ता के आरोपों को अस्वीकृत नहीं माना जा सकता। आयोग ने आदेश दिया कि एसी वापस लेने की शर्त पर पूरी राशि ब्याज सहित लौटाई जाए।
इस निर्णय के बाद उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला ई-कॉमर्स और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में जवाबदेही को और मजबूत करता है। उपभोक्ता मंचों पर ऐसे मामलों में सख्त रुख यह संकेत देता है कि कंपनियों को बिक्री के बाद सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा, अन्यथा देरी पर अतिरिक्त ब्याज देना होगा। इस फैसले ने एक बार फिर उपभोक्ता संरक्षण कानून की प्रभावशीलता को उजागर किया है और कंपनियों के लिए चेतावनी का संदेश दिया है कि खराब उत्पाद और कमजोर सेवा को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
