डीग। राजस्थान में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 14 कथित साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसाते थे। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और मोटरसाइकिल समेत कई सामान बरामद किए गए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उनके कथित नेटवर्क, बैंक खातों और दूसरे सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के अनुसार, अभियान का उद्देश्य जिले में सक्रिय साइबर अपराधियों की पहचान कर उनकी धरपकड़ करना और ऑनलाइन ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन, सिम कार्ड तथा अन्य संसाधनों को जब्त करना है। इसी अभियान के तहत इससे करीब तीन दिन पहले भी पुलिस ने 11 कथित साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था। अब ताजा कार्रवाई में 14 और आरोपियों की गिरफ्तारी से पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ अभियान तेज करने का संकेत दिया है।
पहली कार्रवाई कामां पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) डीग ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनकी पहचान सबलाना निवासी जहीर, मोईन, रोहिन, रिजवान, जाहिद खान और वसीम अकरम के रूप में बताई है। इसके अलावा ढाणा निवासी तामिर हुसैन, असपाक, सोहिल, रोबिन, कादिल और परवेज को भी पकड़ा गया है। पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है और उनके कथित साइबर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
दूसरी कार्रवाई साइबर सेल और डीएसटी की टीम ने की। इस दौरान दिदावली निवासी दो युवकों रामअवतार और दीपक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, रामअवतार की उम्र 20 वर्ष और दीपक की उम्र 19 वर्ष है। इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई। पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच कर रही है, ताकि उनसे किए गए संपर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े सुराग सामने आ सकें।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों पर ऑनलाइन ठगी के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप है। इनमें सस्ते दाम पर लग्जरी होटल बुक कराने का झांसा देकर लोगों से पैसे लेना भी शामिल है। आरोपी कथित तौर पर सोशल मीडिया या मोबाइल फोन के जरिए ऐसे लोगों से संपर्क करते थे जो होटल बुकिंग की तलाश में रहते थे। कम कीमत का लालच देकर उन्हें भुगतान के लिए प्रेरित किया जाता था और इसके बाद रकम कथित तौर पर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों में भेजी जाती थी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इसके अलावा अच्छी नस्ल की दुधारू भैंस दिलाने के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाने का आरोप है। ऑनलाइन संपर्क के जरिए भैंस उपलब्ध कराने और सौदा तय होने का झांसा देकर पहले पैसे मांगे जाते थे। भुगतान के बाद कथित तौर पर पीड़ितों से संपर्क तोड़ दिया जाता था या उन्हें अलग-अलग बहाने बनाकर और रकम देने के लिए कहा जाता था।
पुलिस का कहना है कि कुछ आरोपी ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और धमकी के जरिए भी लोगों से वसूली करते थे। परिचित व्यक्ति या पुलिस अधिकारी बनकर फोन करने और डराने-धमकाने के जरिए रकम मांगने का तरीका भी कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे मामलों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आरोपियों के लिए संपर्क और पीड़ितों को निशाना बनाने का प्रमुख माध्यम बताए जा रहे हैं।
अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनका नेटवर्क कितने लोगों तक फैला हुआ है। जांच में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस कथित नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और ठगी की रकम को किन खातों के जरिए आगे भेजा जाता था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। गिरफ्तारियों के साथ-साथ साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की पहचान और जब्ती पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
