नई दिल्ली: चीन ने ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स और AI कंपैनियन सेवाओं पर नए नियामकीय प्रतिबंध लागू किए हैं, जो उपयोगकर्ताओं को भावनात्मक रूप से अपने ऊपर निर्भर बनाने या वास्तविक सामाजिक संबंधों का विकल्प बनने की कोशिश करते हैं। नए नियमों का उद्देश्य लोगों को वास्तविक सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों के प्रति प्रोत्साहित करना तथा AI के संभावित मनोवैज्ञानिक प्रभावों को नियंत्रित करना बताया गया है।
नए नियमों के तहत टेक कंपनियां ऐसे AI चैटबॉट विकसित या संचालित नहीं कर सकेंगी, जो उपयोगकर्ताओं के साथ अत्यधिक भावनात्मक जुड़ाव या निर्भरता पैदा करें। इसके अलावा, बच्चों और किशोरों के साथ किसी भी प्रकार के वर्चुअल रोमांटिक संबंध स्थापित करने वाले AI फीचर्स पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी AI प्रणाली को बातचीत के दौरान यह संकेत मिले कि कोई उपयोगकर्ता गंभीर मानसिक तनाव, भावनात्मक संकट या आत्म-हानि जैसी स्थिति से गुजर रहा है, तो सेवा प्रदाता को पूर्व निर्धारित आपातकालीन संपर्क को सूचित करने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे।
ये दिशा-निर्देश चीन में संचालित AI कंपैनियन सेवाओं पर लागू होंगे, जिनमें प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विकसित ऐसे उत्पाद भी शामिल हैं जो उपयोगकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत संवाद या डिजिटल साथी जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। नियमों के अनुपालन के लिए कई कंपनियों ने अपने कुछ AI फीचर्स में बदलाव या उन्हें सीमित करने की घोषणा की है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी प्रशासन को चिंता है कि AI आधारित वर्चुअल साथी वास्तविक मानवीय संबंधों, विवाह और परिवार निर्माण की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकते हैं। हाल के वर्षों में चीन में घटती जन्मदर और जनसंख्या में कमी नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है, जिसके मद्देनजर सरकार सामाजिक संबंधों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है।
नई व्यवस्था के अनुसार, AI कंपैनियन सेवाओं को बाजार में उपलब्ध कराने से पहले नियामकीय समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यदि कोई सेवा सुरक्षा, गोपनीयता या सार्वजनिक हित के मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो संबंधित प्राधिकरण उसे संशोधित करने, सीमित करने या बंद करने का अधिकार रखेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, चीन का यह नियामकीय ढांचा कई अन्य देशों की तुलना में अधिक व्यापक और कठोर माना जा रहा है। कुछ देशों में जहां AI चैटबॉट्स के लिए मुख्य रूप से केवल यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि उपयोगकर्ता किसी मानव से नहीं बल्कि AI प्रणाली से बातचीत कर रहा है, वहीं चीन ने भावनात्मक प्रभाव, उपयोगकर्ता सुरक्षा और सामाजिक परिणामों को भी नियमन का हिस्सा बनाया है।
प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित संवाद प्रणालियों का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं को यह समझना चाहिए कि ये सिस्टम मानवीय संबंधों का विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संवेदनशील व्यक्तिगत निर्णय, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या वित्तीय एवं कानूनी मामलों में केवल AI पर निर्भर रहने के बजाय योग्य पेशेवरों और विश्वसनीय मानवीय सहायता का सहारा लेना चाहिए।
चीन के नए नियम वैश्विक स्तर पर AI के सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य देश भी AI कंपैनियन सेवाओं और भावनात्मक AI प्रणालियों के लिए इसी प्रकार के नियामकीय ढांचे पर विचार कर सकते हैं।
