छत्तीसगढ़ की राज्य ऑडिट रिपोर्ट में 11 नगरीय निकायों में राजस्व वसूली की चूक से करीब ₹10 करोड़ के नुकसान का खुलासा हुआ है।

छत्तीसगढ़ में 11 नगरीय निकायों को अधिकारियों की लापरवाही से ₹10 करोड़ का नुकसान: राज्य ऑडिट रिपोर्ट में 800 गंभीर अनियमितताएं उजागर

Team The420
3 Min Read

रायपुर: छत्तीसगढ़ के 11 नगरीय निकायों (Urban Local Bodies-ULBs) में अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित लापरवाही के कारण लगभग ₹9.99 करोड़ (करीब ₹10 करोड़) का वित्तीय नुकसान हुआ है। राज्य संपरीक्षा (State Audit) की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में राजस्व वसूली में गंभीर लापरवाही, वित्तीय अनियमितताओं और वैधानिक नियमों की अनदेखी की ओर संकेत किया गया है।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, कई नगरीय निकायों ने घर-घर कचरा संग्रहण (डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन) के उपयोगकर्ता शुल्क, मोबाइल टावर नवीनीकरण शुल्क तथा विज्ञापन होर्डिंग्स से मिलने वाले राजस्व की समय पर वसूली नहीं की। इसके कारण स्थानीय निकायों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और वे अपनी आय बढ़ाने के बजाय राज्य सरकार के अनुदान पर अधिक निर्भर हो गए।

Only 10 Days Remain: Register Now for FutureCrime Summit 2026 at Bharat Mandapam

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्व की इस कमी के कारण कई नगर निकायों को दैनिक संचालन, विकास कार्यों और कर्मचारियों के वेतन जैसी आवश्यक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ऑडिट के अनुसार, सबसे बड़ा राजस्व नुकसान रायपुर नगर निगम में दर्ज किया गया। वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के दौरान नगर निगम अधिकारियों ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण उपयोगकर्ता शुल्क के रूप में ₹7.52 करोड़ की राशि वसूल नहीं की। इसके अतिरिक्त, निजी भवनों पर लगे होर्डिंग्स, विज्ञापन बोर्ड और व्यावसायिक रूफटॉप विज्ञापनों के किराये के रूप में ₹1.69 करोड़ की राशि भी वसूल नहीं की गई।

राज्य संपरीक्षा विभाग ने एक नगर निगम, 12 नगरपालिकाओं और 14 नगर पंचायतों सहित कुल 27 शहरी निकायों के खातों का परीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न वित्तीय वर्षों से संबंधित अभिलेखों की जांच में 800 गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट विभाग द्वारा उठाई गई 800 आपत्तियों में से संबंधित अधिकारियों ने केवल दो आपत्तियों का ही जवाब दिया, जबकि 798 आपत्तियां अब भी लंबित हैं। अधिकांश नगरीय निकाय निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी ऑडिट आपत्तियों का उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सके।

ऑडिट रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यदि राजस्व संग्रहण, शुल्क वसूली और वित्तीय प्रबंधन में सुधार नहीं किया गया, तो स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट में राजस्व वसूली की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने, वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा लंबित ऑडिट आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

राज्य संपरीक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद अब संबंधित नगरीय निकायों की वित्तीय जवाबदेही, राजस्व वसूली में हुई चूक और अधिकारियों की भूमिका को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article