छत्तीसगढ़ EOW ने मनरेगा सामग्री खरीद में कथित ₹1.69 करोड़ की वित्तीय अनियमितता मामले में 18 साल बाद चार्जशीट दाखिल की है।

मनरेगा सामग्री खरीद घोटाला: 18 साल बाद ₹1.69 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता मामले में आठ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पन्नों की चार्जशीट

Team The420
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रायपुर: छत्तीसगढ़ के आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वर्ष 2006-07 और 2007-08 में सामग्री खरीद में कथित ₹1.69 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में करीब 18 वर्ष बाद विशेष अदालत में 6,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में कांकेर जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सहित सात जनपद पंचायतों के तत्कालीन सीईओ को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि निर्धारित निविदा प्रक्रिया और सरकारी खरीद नियमों का उल्लंघन कर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, यह चार्जशीट कांकेर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश की अदालत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत दायर की गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।

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जांच में सामने आया कि मनरेगा के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक फ्लेक्स बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन प्रपत्र, रोजगार गारंटी दिशा-निर्देश, रोजगार उपलब्धता रजिस्टर तथा श्रमिक सूचना पत्रक जैसी विभिन्न सामग्रियों की खरीद निर्धारित निविदा प्रक्रिया और खरीद नियमों का पालन किए बिना की गई। एजेंसी का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, कांकेर जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ के.पी. देवांगन ने जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीद प्रणाली लागू की, जबकि तत्कालीन सरकारी नियमों के अनुसार सामग्री खरीद का अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को स्वतंत्र रूप से प्राप्त था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था के माध्यम से वैधानिक खरीद प्रक्रिया को दरकिनार किया गया और कई स्तरों पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान छत्तीसगढ़ पंचायत (सामग्री एवं वस्तु क्रय) नियम, छत्तीसगढ़ स्टोर्स परचेज नियम तथा छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से निर्धारित खरीद प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। ईओडब्ल्यू का कहना है कि इन नियमों के उल्लंघन के कारण सरकारी धन का अनुचित उपयोग हुआ और खरीद प्रक्रिया में आवश्यक प्रतिस्पर्धा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई।

चार्जशीट के अनुसार, देवांगन ने कांकेर, नरहरपुर, चारामा, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, भानुप्रतापपुर और दुर्गकोंदल जनपद पंचायतों के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के साथ कथित साजिश कर ₹1,69,14,247 के सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। इसमें लगभग ₹39.90 लाख की कथित अनियमितता कांकेर जिला पंचायत में तथा लगभग ₹1.29 करोड़ की सातों जनपद पंचायतों में दर्ज की गई है।

चार्जशीट में जिन आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं, उनमें सेवा से बर्खास्त किए जा चुके तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के.पी. देवांगन के अलावा राधाकांत कर (कांकेर), गोवर्धन गजबल्ला (नरहरपुर), परदेशी राम मरकाम (चारामा), भारत राम नेताम (अंतागढ़), रामकिशुन ध्रुव (कोयलीबेड़ा), जी.आर. ठाकुर (भानुप्रतापपुर) और सांवलदास बघेल (दुर्गकोंदल) शामिल हैं। आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

ईओडब्ल्यू ने यह भी बताया कि के.पी. देवांगन के खिलाफ वर्ष 2009 और 2010 में भी भ्रष्टाचार से जुड़े दो अन्य मामले दर्ज किए गए थे। उन मामलों में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने, पद का दुरुपयोग करने, खरीद नियमों का उल्लंघन करने तथा लगभग ₹8.44 करोड़ के सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, उन दोनों मामलों में भी अंतिम रिपोर्ट और चार्जशीट पहले ही अदालत में दाखिल की जा चुकी है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि सरकारी खरीद से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, ई-टेंडर दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन, स्वीकृति फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक संचार का वैज्ञानिक विश्लेषण जांच को मजबूत बनाता है। उनके अनुसार, पारदर्शी खरीद प्रणाली, नियमित ऑडिट, डिजिटल निगरानी और जवाबदेही तंत्र को मजबूत करना सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और प्रभावी अभियोजन से शासन व्यवस्था में लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

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