₹147 करोड़ नगर निगम फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले में पूर्व बैंक वाइस-प्रेसिडेंट न्यायिक हिरासत में, मनी ट्रेल जांच तेज हुई

₹158 करोड़ FDR घोटाले में बड़ा मोड़: ₹35 करोड़ ट्रांसफर वाले खाते की महिला ने किया सरेंडर, जांच में खुला संगठित नेटवर्क

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By Roopa
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चंडीगढ़/पंचकूला: बहुचर्चित ₹158 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां मामले की एक अहम आरोपी स्वाति तोमर ने पंचकूला स्थित एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उनके बैंक खाते में करीब ₹35 करोड़ की रकम ट्रांसफर हुई थी, जिससे इस पूरे घोटाले की गंभीरता और बढ़ गई है और एक बड़े वित्तीय नेटवर्क की ओर संकेत मिला है।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली और वर्तमान में चंडीगढ़ में निवास कर रही स्वाति तोमर अपने वकील के साथ ACB कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने अधिकारियों के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और अब उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया जारी है।

बचाव पक्ष का कहना है कि स्वाति तोमर को इस कथित घोटाले की कोई जानकारी नहीं थी। उनके वकील के अनुसार, सह-आरोपी रजत डहरा ने उन्हें सरकारी काम और सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का झांसा दिया था। इसी भरोसे में उन्होंने अपने दस्तावेज़ साझा कर दिए, जिनका बाद में कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उनके नाम पर बैंक खाते खोले गए और उन्हें इस वित्तीय जाल में शामिल दिखाया गया।

जांच में सामने आया है कि स्वाति तोमर के नाम पर खोले गए बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी विवरण कथित तौर पर बदल दिए गए थे। इस वजह से उन्हें खाते में होने वाले लेन-देन की जानकारी नहीं मिल सकी, जिसमें OTP अलर्ट भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाते में जमा की गई रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे धन के प्रवाह को ट्रैक करना बेहद जटिल हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, स्वाति तोमर को इस मामले की जानकारी तब हुई जब जांच एजेंसियों ने उनके परिजनों से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने खुद सामने आकर सरेंडर किया। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि वह इस पूरे नेटवर्क की सक्रिय सदस्य थीं या सिर्फ उनके दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया गया।

इससे पहले सह-आरोपी रजत डहरा से पूछताछ में यह खुलासा हुआ था कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच उसके दो बैंक खातों में ₹60 करोड़ से अधिक की राशि आई थी। बाद में इस रकम को कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, जो एक सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

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अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक बैंक से जुड़ा अधिकारी, दो निजी व्यक्ति और नगर निगम का एक कर्मचारी शामिल है। नगर निगम के कर्मचारी की संलिप्तता सामने आने से यह मामला और संवेदनशील हो गया है और अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी गहराई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें फर्जी दस्तावेज़, शेल अकाउंट्स और वित्तीय प्रणाली में तकनीकी हेरफेर का सहारा लिया गया। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर भारी भरकम रकम को बिना तुरंत पकड़े गए इधर-उधर किया गया।

मामला 24 मार्च को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि क्या अन्य अधिकारी या बैंक कर्मी भी इस घोटाले में शामिल थे या उन्होंने संदिग्ध लेन-देन को नजरअंदाज किया।

इसी बीच, मामले में गिरफ्तार नगर निगम कर्मचारी की तबीयत रिमांड के दौरान बिगड़ गई। उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों के अनुसार, उसे दौरे और तेज दर्द की शिकायत थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वित्तीय घोटालों में अक्सर आम लोगों के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग कर लेयरिंग के जरिए पैसों को घुमाया जाता है। यह ट्रेंड व्हाइट-कॉलर क्राइम के बढ़ते स्वरूप को दर्शाता है, जहां अपराधी तकनीकी कमजोरियों के साथ-साथ मानवीय विश्वास का भी फायदा उठाते हैं।

जांच एजेंसियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने निजी और वित्तीय दस्तावेज़ बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी को न दें। नौकरी या सरकारी काम के नाम पर मिलने वाले ऑफर भी कई बार ऐसे फ्रॉड का जरिया बन सकते हैं।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। फिलहाल, स्वाति तोमर की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह इस नेटवर्क का हिस्सा थीं या केवल एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल की गईं।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे संगठित वित्तीय गिरोह प्रशासनिक और डिजिटल खामियों का फायदा उठाकर बड़े स्तर पर घोटालों को अंजाम देते हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

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