चंडीगढ़: साइबर क्राइम पुलिस ने चंडीगढ़ निवासी से कथित तौर पर ₹85 हजार की ऑनलाइन ठगी के मामले में दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय मनोहर और 20 वर्षीय अंकित गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित के मोबाइल में एक APK फाइल इंस्टॉल होने के बाद उसका डिवाइस कथित तौर पर साइबर ठगों के नियंत्रण में आ गया और बैंक खाते से बिना अनुमति रकम ट्रांसफर कर दी गई।
मामले में 8 मई को साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसके UPI से जुड़े ICICI बैंक खाते से ₹85 हजार की रकम धोखाधड़ी से निकाल ली गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़ित के मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी गई थी। इसे इंस्टॉल करने के बाद मोबाइल की सुरक्षा कथित तौर पर प्रभावित हुई और ठगों ने बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन कर दिया।
पुलिस के अनुसार, रकम के लेनदेन की जांच में सामने आया कि ₹45 हजार एक Federal Bank खाते में जमा हुए, जो कथित तौर पर मनोहर से जुड़ा था। इसके अलावा ₹40 हजार एक SBI खाते में ट्रांसफर किए गए, जिसे पुलिस ने अंकित गुप्ता से संबंधित बताया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों खातों में पहुंची रकम बाद में ATM के जरिए निकाली गई।
जांचकर्ताओं ने बैंक लेनदेन, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर रकम प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास किया। तकनीकी और मैदानी जांच से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने दिल्ली में छापेमारी की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और एक ATM कार्ड बरामद किया है। जब्त किए गए मोबाइल फोन और ATM कार्ड की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका इस्तेमाल कथित ठगी में किस तरह किया गया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद उपकरण किसी अन्य साइबर अपराध से जुड़े हैं या नहीं।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर इस अपराध में एक अन्य व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी दी। अब जांच एजेंसी उस कथित तीसरे आरोपी की पहचान और उसकी भूमिका का पता लगाने में जुटी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने मिलकर कितने लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया।
अदालत से दोनों आरोपियों की एक दिन की पुलिस रिमांड हासिल की गई थी। रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल उपकरणों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) यानी धोखाधड़ी, धारा 319(2) यानी प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, धारा 336(3) यानी जालसाजी, धारा 338, धारा 340(2) यानी फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और धारा 61(2) यानी आपराधिक साजिश के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों के पास अन्य बैंक खातों तक पहुंच थी या नहीं और क्या वे किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस कथित तीसरे आरोपी की तलाश के साथ संभावित अन्य पीड़ितों का भी पता लगा रही है।
यह मामला अनजान स्रोतों से मिलने वाली APK फाइलों को मोबाइल में इंस्टॉल करने के जोखिम को भी सामने लाता है। ऐसी फाइलें डिवाइस की सुरक्षा से समझौता कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती हैं। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी रखते हुए ठगी की पूरी कड़ी और संभावित अन्य आरोपियों का पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी है।
