पति-पत्नी और दो सगे भाइयों समेत पांच गिरफ्तार; रास्ता पूछने के बहाने बुजुर्ग और आभूषण पहनी महिलाओं को बनाते थे निशाना, सोने के कुंडल और ₹5 हजार बरामद

फर्जी ‘ब्लाइंड एसोसिएशन’ के नाम पर चंदा, फिर महिलाओं की रेकी; चंदौसी में अंतरराज्यीय टप्पेबाज गिरोह का भंडाफोड़

Roopa
By Roopa
6 Min Read

चंदौसी: दृष्टिहीन लोगों की मदद और नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के नाम पर लोगों का भरोसा जीतने के बाद महिलाओं को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय टप्पेबाज गिरोह का चंदौसी पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड पति-पत्नी, दो सगे भाइयों और एक महिला समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य पहले चंदा मांगने के बहाने इलाके में घूमकर रेकी करते थे और फिर बुजुर्ग महिलाओं तथा नाक-कान में सोने के आभूषण पहनी महिलाओं को निशाना बनाते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से टप्पेबाजी में लूटे गए सोने के कुंडल और ₹5 हजार बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और हरियाणा में भी वारदात करता था। गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है। रविवार को पुलिस कार्यालय में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गिरोह के खुलासे की जानकारी दी।

चंदे की पर्ची से बनाते थे भरोसा

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के नाम पर लोगों से ₹50 और ₹100 का चंदा मांगते थे। रकम लेने के बाद वे ‘लखनऊ एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड’ के नाम की पर्ची देते थे। पुलिस के मुताबिक, चंदा मांगने की यह गतिविधि केवल पैसे जुटाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके जरिए आरोपी लोगों के बीच सामान्य और भरोसेमंद छवि बनाने की कोशिश करते थे।

इसी दौरान गिरोह के सदस्य बाजार, सड़क और भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिलाओं की पहचान करते थे। खासतौर पर बुजुर्ग महिलाओं और नाक-कान में सोने के आभूषण पहनने वाली महिलाओं पर नजर रखी जाती थी। लक्ष्य तय होने के बाद उनके पीछे चलकर उनकी गतिविधियों और आने-जाने के रास्ते की जानकारी जुटाई जाती थी।

पहले रेकी, फिर महिला सदस्य बनाती थी भरोसा

पुलिस के मुताबिक, गिरोह में राजू और उसकी पत्नी माया रेकी करने का काम करते थे। दोनों संभावित शिकार पर नजर रखते और यह देखते थे कि महिला के पास कितने आभूषण हैं तथा वह किस रास्ते से जा रही है।

इसके बाद गिरोह की महिला सदस्य तुलसी कथित तौर पर टारगेट महिला से बातचीत शुरू करती थी। वह किसी सामान्य बहाने से बातचीत करते हुए महिला का भरोसा जीतती और उसे अपने साथ आगे चलने के लिए तैयार करती थी। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से महिला को मुख्य सड़क या भीड़ से दूर ले जाने की कोशिश की जाती थी।

एकांत में घेरकर करते थे टप्पेबाजी

पुलिस का आरोप है कि महिला को एकांत स्थान पर पहुंचाने के बाद गिरोह के अन्य सदस्य सक्रिय हो जाते थे। गिरोह में शामिल गंगाराम और कल्लू, जो सगे भाई बताए गए हैं, महिला को घेर लेते थे। इसके बाद डराने-धमकाने या वारदात के लिए दबाव बनाने के बाद उसके आभूषण छीन लिए जाते थे।

इसी तरीके से चंदौसी में नारायणी देवी को निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया। नारायणी देवी, भगवानदास की पत्नी हैं और चंदौसी के सीकरी गेट की रहने वाली हैं। वर्तमान में वह मौलागढ़ की आनंद विहार कॉलोनी में रह रही हैं।

रास्ता पूछने के बहाने महिला को बनाया निशाना

नारायणी देवी की शिकायत के मुताबिक, दो अज्ञात पुरुष और एक महिला रास्ता पूछने के बहाने उनके साथ चलने लगे। बातचीत करते हुए वे उन्हें एक सुनसान स्थान की ओर ले गए। वहां पहुंचने के बाद तीनों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर जान से मारने का भय दिखाया।

आरोप है कि इसी दौरान उनके दोनों कानों के सोने के कुंडल लूट लिए गए। घटना के बाद महिला ने चंदौसी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए संदिग्धों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू की।

खुर्जागेट रोड से पांचों गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, रविवार को चंदौसी पुलिस ने खुर्जागेट से करेली वाले रोड पर संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पांच लोगों को पकड़ा। उनकी पहचान गंगाराम निवासी चमरी, थाना कोतवाली नगर, हापुड़; कल्लू राय और तुलसी निवासी लक्ष्मणगंज, घेरूआ फाटक, मथुरा; तथा राजू और उसकी पत्नी माया के रूप में हुई।

पूछताछ और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने सभी को संबंधित मामले से जोड़ते हुए कार्रवाई की। आरोपियों के पास से सोने के कुंडल और ₹5 हजार मिले हैं।

राजस्थान और हरियाणा तक फैला नेटवर्क

एसपी के अनुसार, पूछताछ में गिरोह के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और हरियाणा में भी सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन राज्यों में दर्ज पुराने मामलों और आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

जांच का अगला चरण गिरोह की अन्य संभावित वारदातों, चंदा वसूली के लिए इस्तेमाल की गई पर्चियों, रेकी के तरीकों और लूटे गए आभूषणों की बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान पर केंद्रित है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में पांच गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कितने लोग शामिल थे।

हमसे जुड़ें

Share This Article