CGPSC भर्ती घोटाले में ED ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर मनी ट्रेल और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर की जांच तेज की है।

CGPSC भर्ती घोटाला: कथित पेपर लीक और चयन में हेरफेर मामले में पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार, ईडी मनी ट्रेल की जांच में जुटी

Team The420
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नई दिल्ली/रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को कथित भर्ती घोटाले, प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के माध्यम से अवैध लाभ लेकर रिश्तेदारों और पसंदीदा उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियां दिलाने की साजिश रची गई। सोनवानी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है और रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 30 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

ईडी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच छत्तीसगढ़ के आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW)/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच की। जांच एजेंसी का आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष समेत कई लोगों ने अवैध लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए आपराधिक साजिश रची।

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जांच एजेंसी का आरोप है कि सीजीपीएससी के अध्यक्ष रहते हुए सोनवानी ने कुछ सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित रूप से प्रश्नपत्र लीक कराए और चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया। ईडी के अनुसार, इस कथित साजिश का उद्देश्य अपने रिश्तेदारों और पसंदीदा उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) जैसे प्रतिष्ठित सरकारी पदों पर निष्पक्ष प्रतियोगिता के बजाय कथित अनियमित तरीकों से चयनित कराना था।

ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि मामला केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि भर्ती नियमों में कथित बदलाव भी इस साजिश का हिस्सा था। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे तथ्य मिले हैं जिनके अनुसार वर्ष 2021 में भर्ती नियमों में संशोधन कर “परिवार” की परिभाषा से “भतीजे” शब्द को हटाया गया। जांचकर्ताओं का संदेह है कि यह बदलाव कथित रूप से सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन का मार्ग आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायालय में अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की सुनवाई जारी है।

ईडी का दावा है कि कथित भर्ती घोटाले से अर्जित अवैध धन का एक हिस्सा नकद के रूप में लिया गया, जबकि शेष राशि को कई बैंक खातों और विभिन्न वित्तीय लेनदेन के माध्यम से लेयरिंग कर छिपाने का प्रयास किया गया। एजेंसी अब कथित मनी ट्रेल का पता लगाकर यह जानने का प्रयास कर रही है कि अवैध धन किन-किन लोगों तक पहुंचा और उसका किस प्रकार उपयोग किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, 25 जुलाई को पीएमएलए की धारा 19 के तहत सोनवानी को गिरफ्तार किया गया। ईडी का आरोप है कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत पूछताछ के दौरान उन्होंने टालमटोल और असहयोगपूर्ण जवाब दिए तथा जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया। एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य लाभार्थियों की पहचान करने, अपराध से अर्जित धन का पता लगाने और पूरे वित्तीय नेटवर्क का खुलासा करने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर व्यापक बहस चल रही है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में सामने आए परीक्षा घोटालों के बाद परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को मजबूत बनाने की मांग लगातार उठ रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक परीक्षा घोटालों में दस्तावेजों में हेरफेर, डिजिटल संचार, वित्तीय लेयरिंग और संगठित नेटवर्क की भूमिका तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल संचार और भर्ती संबंधी डेटा की फॉरेंसिक जांच पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में मजबूत डिजिटल सुरक्षा, नियमित ऑडिट और पारदर्शी व्यवस्था ही ऐसे संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

ईडी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी कथित भर्ती घोटाले से लाभान्वित सभी व्यक्तियों की पहचान, मनी ट्रेल की पड़ताल तथा पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने में लगी है। जांच के दौरान यदि अन्य सरकारी कर्मचारियों, निजी व्यक्तियों या लाभार्थियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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