नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े कथित ₹27,337 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामलों में शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने दिल्ली और मुंबई में कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी कर कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य खंगाले।
CBI के अनुसार, ये कार्रवाई रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी 23 आपस में संबंधित संस्थाओं के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल बैंकों से लिए गए कर्ज की रकम को कथित रूप से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया, जिससे सरकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के लिए मुंबई की विशेष अदालत से वारंट प्राप्त किए गए थे। तलाशी अभियान के दौरान रिलायंस समूह से जुड़े तीन पूर्व अधिकारियों के परिसरों को भी कवर किया गया। इनमें RHFL के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO), रिलायंस एडीए ग्रुप के पूर्व सेक्रेटेरियल हेड और RHFL के पूर्व मुख्य ट्रेजरी सलाहकार शामिल हैं।
CBI ने इस मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), RHFL, RCFL और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए हैं।
एजेंसी के मुताबिक, इन सात मामलों में बैंकों और LIC को कथित तौर पर कुल करीब ₹27,337 करोड़ का नुकसान हुआ है। जांच में आरोप लगाया गया है कि कर्ज के रूप में प्राप्त धनराशि को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित कंपनियों और समूह की अन्य इकाइयों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।
CBI ने इससे पहले भी रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। एजेंसी अब तक 38 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है, चार आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बड़े कॉरपोरेट लोन मामलों में फंड के इस्तेमाल, ऋण पुनर्गठन और संबंधित कंपनियों के बीच लेनदेन की जांच लगातार तेज हो रही है। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर कर्ज की रकम किन माध्यमों से दूसरी संस्थाओं तक पहुंचाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और संभावित आरोपियों की भूमिका तय की जाएगी।
जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
