चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ शैली के साइबर धोखाधड़ी मामले में एक नई FIR दर्ज की है। जांच अब पंजाब पुलिस से ट्रांसफर कर CBI के विशेष अपराध शाखा, चंडीगढ़ यूनिट को सौंप दी गई है।
FIR के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत दर्ज किया गया है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धोखाधड़ी और छद्म नाम का उपयोग करने से संबंधित अपराधों को कवर करता है।
मामला मूल रूप से 2025 में जालंधर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता, सुखमंदर सिंह, जालंधर निवासी, ने आरोप लगाया कि अज्ञात व्यक्तियों ने मई और जून 2025 के बीच ऑनलाइन माध्यमों से उन्हें धोखा दिया।
CBI अधिकारियों ने बताया कि इस FIR में धोखाधड़ी के कई लेनदेन शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से रूट किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, जिससे ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण रहा।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी घटनाएं बढ़ती साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाती हैं और इससे न केवल व्यक्तिगत वित्तीय नुकसान होता है, बल्कि आम जनता में डिजिटल लेनदेन और सुरक्षा पर भरोसा भी प्रभावित होता है।
CBI ने FIR में स्पष्ट किया है कि अज्ञात आरोपियों की पहचान और उनके बैंकिंग लेनदेन की जाँच प्राथमिकता है। मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में की जा रही है, ताकि सभी डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित और सही तरीके से विश्लेषण किया जा सके।
आलोचक मानते हैं कि इस प्रकार के मामलों में हाईकोर्ट के निर्देश और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई नागरिकों के विश्वास की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे पहले, पंजाब पुलिस द्वारा की जा रही जांच में विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आई थीं, जिसके कारण उच्च न्यायालय ने मामला CBI को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी होगी और डिजिटल प्रमाणों को व्यवस्थित रूप से संग्रहित किया जाना चाहिए।
जांच के दौरान CBI ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी संबंधित दस्तावेज, डिजिटल ट्रांज़ेक्शन और प्लेटफॉर्म लॉग्स की सत्यता की पुष्टि की जाए। इसके अलावा, संभावित पीड़ितों और गवाहों से साक्ष्य संकलित करना प्राथमिकता होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस FIR और केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की प्रक्रिया से न केवल जालंधर, पंजाब बल्कि पूरे क्षेत्र में साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर नजर रखी जा सकेगी। इसका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की डिजिटल धोखाधड़ी को रोकना और त्वरित कानूनी कार्रवाई को सुनिश्चित करना है।
यह मामला इस संदर्भ में भी अहम है कि डिजिटल अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे नागरिकों को सावधानी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।
