नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत दो अलग-अलग मामलों में वांछित भारतीय भगोड़ों को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। इनमें एक आरोपी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा हत्या और गैरकानूनी गतिविधियों के मामले में वांछित था, जबकि दूसरा बहु-करोड़ रुपये की निवेश धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहा था। दोनों आरोपियों को इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर संबंधित देशों में हिरासत में लेने के बाद 23 जुलाई को भारत भेजा गया।
CBI के अनुसार, पहला आरोपी मुहम्मदअली कन्नीर पल्लियालिल है, जिसे NIA हत्या और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े मामले में तलाश रही थी। एजेंसी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी कराया गया था। इसके बाद उसकी लोकेशन सऊदी अरब में चिन्हित की गई और वहां की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उसे हिरासत में ले लिया।
अधिकारियों के मुताबिक, CBI ने विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्यर्पण और निर्वासन संबंधी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कराईं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को 23 जुलाई को भारत भेज दिया गया।
CBI के अनुसार, जांच में आरोप है कि मुहम्मदअली कन्नीर पल्लियालिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक बड़ी आपराधिक साजिश के तहत घातक हथियारों से लैस होकर एक व्यक्ति की दुकान में जबरन प्रवेश किया। आरोपियों ने पीड़ित को अवैध रूप से रोका, उस पर जानलेवा हथियारों से हमला किया और गंभीर चोटें पहुंचाने के बाद उसकी हत्या कर दी। इस मामले की जांच NIA कर रही है।
इसी दिन एक अन्य अभियान में CBI ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से संयुक्त अरब अमीरात से अविनाश अर्जुन राठौड़ को भी भारत वापस लाने की कार्रवाई पूरी की। राठौड़ बहु-करोड़ रुपये की निवेश धोखाधड़ी के मामले में वांछित था और उसके खिलाफ भी इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस जारी किया गया था।
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जांच एजेंसियों के अनुसार, राठौड़ पर आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निवेशकों को विभिन्न निवेश योजनाओं में निश्चित मासिक रिटर्न का झूठा वादा कर बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाया। आरोप है कि निवेशकों से प्राप्त राशि का गबन किया गया और उसे कई बैंक खातों तथा डीमैट खातों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित कर वित्तीय ट्रेल को छिपाने का प्रयास किया गया।
CBI ने बताया कि इंटरपोल चैनलों के माध्यम से जारी रेड नोटिस के बाद राठौड़ की पहचान संयुक्त अरब अमीरात में हुई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे 23 जुलाई को भारत भेजा गया। मुंबई पहुंचने पर महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया और आगे की जांच के लिए संबंधित एजेंसी को सौंप दिया गया।
CBI ने कहा कि भारत में इंटरपोल के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (National Central Bureau) के रूप में वह BHARATPOL के माध्यम से विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करती है। इसी व्यवस्था के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार अपराधियों का पता लगाने, रेड नोटिस जारी कराने, गिरफ्तारी और भारत वापसी की प्रक्रिया संचालित की जाती है।
एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल के सहयोग और विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से 170 से अधिक वांछित अपराधियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होने से विदेश भागने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी हुई है और गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया तेज हुई है।
यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग, रेड नोटिस प्रणाली और विभिन्न देशों के साथ कानूनी समन्वय की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार अपराध, आतंकवाद और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों में इस तरह का सहयोग भविष्य में भी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और भारत वापसी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
