ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

सीमा पार फैला ‘स्कैम इंडस्ट्री’ का साम्राज्य: कंबोडिया में फर्जी पुलिस स्टेशनों से चल रहा था वैश्विक ठगी नेटवर्क

Roopa
By Roopa
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दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के अंडरवर्ल्ड का एक चौंकाने वाला चेहरा Cambodia से सामने आया है। सीमावर्ती शहर O Smach में स्थित एक विशाल ठगी कंपाउंड ने यह उजागर कर दिया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी अब एक संगठित और बहुराष्ट्रीय “इंडस्ट्री” का रूप ले चुकी है। इस परिसर के भीतर नकली बैंक, फर्जी पुलिस स्टेशन और सैकड़ों कॉलिंग बूथ बनाए गए थे, जहां से दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाया जाता था।

यह पूरा परिसर Royal Hill Casino के पीछे स्थित था, जिसे हाल ही में सैन्य कार्रवाई के बाद खाली पाया गया। अंदर का दृश्य बेहद चौंकाने वाला था—कमरों में नकली अमेरिकी डॉलर बिखरे पड़े थे, दीवारों पर “हर तरफ से पैसा आ रहा है” जैसे संदेश लिखे थे और अलग-अलग देशों की संस्थाओं की हूबहू नकल तैयार की गई थी।

जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क में हजारों लोग काम कर रहे थे, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन्हें आकर्षक नौकरी का लालच देकर यहां लाया जाता था, लेकिन बाद में उन्हें जबरन साइबर ठगी के काम में लगा दिया जाता था। बचकर निकलने वाले लोगों ने बताया कि उनसे रोज 15 से 16 घंटे तक काम कराया जाता था और लक्ष्य पूरा न करने पर शारीरिक सजा दी जाती थी।

पीड़ितों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी एक दिन में नया शिकार नहीं ढूंढ पाता था, तो उसे डंडों से पीटा जाता था। लगातार असफल रहने पर सजा और कठोर हो जाती थी। यहां तक कि शौचालय जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती थी और हर गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाता था।

इस कंपाउंड की सबसे डरावनी बात यह थी कि यहां ऑस्ट्रेलिया, चीन और ब्राजील जैसे देशों के नकली पुलिस स्टेशन बनाए गए थे। इनका इस्तेमाल लोगों को डराने के लिए किया जाता था। उदाहरण के तौर पर, ब्राजील पुलिस के नाम पर फर्जी नोटिस जारी किए जाते थे, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाकर लोगों को डराया जाता और उनसे पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगों को पहले से तैयार स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिससे वे लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता बना सकें। कई मामलों में कर्मचारियों को खुद को अमीर महिला या कारोबारी बताकर विदेशी नागरिकों से बातचीत करने को कहा जाता था। धीरे-धीरे भरोसा जीतने के बाद उन्हें फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाया जाता था।

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इस पूरे नेटवर्क के तार प्रभावशाली कारोबारी और राजनीतिक लोगों से भी जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। Ly Yong Phat और Lim Heng जैसे नाम सामने आए हैं, जिनके परिसरों में इस तरह की गतिविधियां चलने के आरोप हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के दायरे में है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई एक देश की समस्या नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा है। वर्षों तक ऐसे ठगी केंद्रों को नजरअंदाज किया गया, लेकिन अब बढ़ते वैश्विक दबाव के चलते Hun Manet की सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

हाल के महीनों में कई छापेमारी अभियान चलाए गए हैं और हजारों विदेशी कामगारों को इन ठिकानों से मुक्त कराया गया है। इसी कड़ी में कथित स्कैम नेटवर्क से जुड़े कारोबारी Chen Zhi को गिरफ्तार कर चीन भेजा गया, जिसे इस पूरे मामले में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या बेहद गहरी है और केवल छापेमारी से खत्म नहीं होगी। ठग आसानी से अपने ठिकाने बदल लेते हैं और नए स्थानों से गतिविधियां शुरू कर देते हैं। इसे “एक खत्म करो, दूसरा सामने आ जाए” जैसी स्थिति बताया जा रहा है।

यह मामला यह भी दिखाता है कि आधुनिक साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों की भावनाओं का भी फायदा उठाते हैं। नकली पहचान, वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को विश्वास में लेकर उनकी जमा पूंजी तक ठग ली जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से निपटने के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय, सख्त कानून और उन्नत तकनीकी निगरानी बेहद जरूरी है। साथ ही, आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे गिरोह लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या कंबोडिया और अन्य देश मिलकर इस तेजी से फैलती ठगी की इंडस्ट्री पर लगाम लगा पाते हैं या नहीं, क्योंकि इसका असर अब वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

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