India Post Payments Bank में बड़े ऑपरेशनल और तकनीकी सवाल; एक ही नंबर से जुड़े कई ग्राहक, 7.82% तक पहुंची UPI फेल रेट

डाक बैंकिंग पर CAG की सख्त टिप्पणी: बिना मोबाइल वेरिफिकेशन खुले खाते, UPI फेलियर और सिस्टम खामियों ने बढ़ाई चिंता

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित India Post Payments Bank (IPPB) पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संसद में पेश इस ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बैंक ने कई खातों को बिना मोबाइल नंबर के उचित सत्यापन के ही खोल दिया, जबकि कुछ मामलों में एक ही मोबाइल नंबर को कई ग्राहकों से जोड़ दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रणालीगत कमजोरी का संकेत है, जो बैंकिंग सुरक्षा और ग्राहक विश्वास दोनों के लिए खतरा बन सकती है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब डिजिटल बैंकिंग और UPI ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, इस तरह की खामियां गंभीर चिंता का विषय हैं।

CAG के ऑडिट में यह भी सामने आया कि IPPB के बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय (dormant) या कम उपयोग में पाए गए। इससे संकेत मिलता है कि बैंक द्वारा खोले गए खातों का एक बड़ा हिस्सा सक्रिय वित्तीय सेवाओं में योगदान नहीं दे रहा, जो वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को कमजोर करता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि IPPB की डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। कई अनुरोध या तो लंबित रहे, रद्द हो गए या फिर समय पर पूरे नहीं किए गए। इससे बैंक की सेवा वितरण क्षमता पर भी सवाल उठे हैं।

सबसे अहम चिंता UPI सेवाओं से जुड़ी सामने आई। National Payments Corporation of India के डेटा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि IPPB की UPI ट्रांजैक्शन में तकनीकी फेलियर रेट काफी अधिक रही। वित्त वर्ष 2021-22 में यह दर 3.29% थी, जो 2022-23 में बढ़कर 7.82% तक पहुंच गई—जबकि Reserve Bank of India द्वारा तय मानक 1% से कम है।

यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि बैंक की डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में गंभीर खामियां मौजूद हैं, जो ग्राहकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2023-24 में IPPB की UPI सेवाओं में कुल 362 घंटे तक आउटेज रहा, जो अन्य पेमेंट बैंकों की तुलना में काफी ज्यादा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार फेल हो रहे ट्रांजैक्शन और सर्विस आउटेज न केवल ग्राहक अनुभव को खराब करते हैं, बल्कि डिजिटल भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी असर डालते हैं। खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहां IPPB की बड़ी भूमिका है, इस तरह की समस्याएं वित्तीय समावेशन के प्रयासों को झटका दे सकती हैं।

CAG ने अपनी रिपोर्ट में IPPB को कई अहम सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है। इसमें डेटा क्लीनिंग कर डुप्लीकेट या गलत लिंक को हटाना, अकाउंट खोलते समय वेरिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत करना और IT सिस्टम में मौजूद खामियों को दूर करना शामिल है।

इसके अलावा, UPI सेवाओं के लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और तय मानकों के अनुरूप प्रदर्शन सुनिश्चित करने की भी सिफारिश की गई है। CAG का मानना है कि इन सुधारों के बिना IPPB के लिए अपने उद्देश्यों—खासकर वित्तीय समावेशन—को प्रभावी ढंग से हासिल करना मुश्किल होगा।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि IPPB ने अपने नेटवर्क विस्तार और ग्राहक आधार बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन ऑपरेशनल और तकनीकी चुनौतियां इसकी कार्यक्षमता को सीमित कर रही हैं।

इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि डिजिटल बैंकिंग के तेजी से विस्तार के बीच मजबूत नियामकीय अनुपालन और तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले समय में IPPB द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि वह ग्राहक भरोसे को कितना बहाल कर पाता है और अपने मूल उद्देश्य—हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने—को कितना सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है।

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