कमजोर निगरानी और अनुपालन चूक से ₹74,766 करोड़ का संभावित राजस्व प्रभावित; सिस्टमिक और नियम उल्लंघन के मामलों की सूची जारी

CAG रिपोर्ट में बैंकों और NBFCs के कर लाभ में बड़े अनियमितताएँ सामने आईं

Roopa
By Roopa
4 Min Read

नई दिल्ली: भारत के महालेखा परीक्षक (CAG) ने संसद में पेश अपनी ताजा रिपोर्ट में बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) द्वारा दावा किए गए कर लाभ और छूट में व्यापक अनियमितताएं उजागर की हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इन अनियमितताओं का संभावित प्रभाव ₹74,766 करोड़ तक हो सकता है।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि CAG ने जून 2023 तक कुल 2,378 मामलों का नमूना परीक्षण किया और इन मामलों में इनकम टैक्स विभाग की जांच और छूट/कटौतियों के प्रबंधन की समीक्षा की। इस दौरान सिस्टमिक कमजोरियों, अनुपालन की चूक और निगरानी में गaps सामने आए। CAG ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि कर नियमों और रिज़र्व बैंक की दिशा-निर्देशों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया जाए, और NBFCs के कर प्रावधानों में मौजूद अंतर को दूर किया जाए।

रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख आंकड़े

CAG ने कुल 1,847 अवलोकन किए, जिनमें 671 सिस्टमिक मुद्दे और 533 अनुपालन से जुड़ी चूकें शामिल हैं। सबसे बड़ी विसंगतियाँ मुख्यतः बुरे ऋण (bad debts) के लिए गलत कटौती, संदेहास्पद ऋणों के प्रावधान और विशेष रिज़र्व में राशि हस्तांतरण के मामलों में पाई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की खामियाँ वित्तीय संस्थानों की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की कमजोरी को दर्शाती हैं। “सिस्टमिक गड़बड़ी और अनुपालन चूकें राजस्व नुकसान के लिए प्रमुख कारण बनती हैं। यह आवश्यक है कि बैंक और NBFCs दोनों अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप रखें,” वित्तीय विश्लेषक ने कहा।

सिस्टमिक कमजोरियाँ और अनुपालन चूकें

रिपोर्ट में बैंकों और NBFCs के भीतर मुख्य समस्याओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

1. सिस्टमिक कमजोरियाँ: इन मामलों में मुख्य रूप से कर नियमों और बैंकिंग प्रावधानों के बीच तालमेल का अभाव, वित्तीय दस्तावेज़ों की असंगत रिकॉर्डिंग और रिज़र्व बैंक दिशानिर्देशों का पालन न करना शामिल है।

2. अनुपालन चूकें: इनमें गलत कटौतियाँ, समय पर रिपोर्टिंग का अभाव और वित्तीय निगरानी में ढील शामिल हैं।

3. विशेष अंतर: विशेष रूप से NBFCs में टैक्स छूट और कर कटौती के प्रावधानों में अस्पष्टता और आंतरिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी मिली।

CAG ने सिफारिश की है कि इन संस्थानों के लिए कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कठोर निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। साथ ही, सरकारी विभागों को भी निर्देश दिया गया कि वे इस दिशा में नियमित निरीक्षण और ऑडिट सुनिश्चित करें।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

राजस्व और नीति प्रभाव

CAG के अनुसार, यह खामियाँ न केवल कर राजस्व के नुकसान का कारण हैं बल्कि वित्तीय क्षेत्र की विश्वसनीयता और निवेशकों के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ₹74,766 करोड़ तक के संभावित राजस्व का प्रभाव चिंता का विषय है और इसे समय रहते सही कदम उठाकर कम करना आवश्यक है।

साथ ही, CAG ने संसद से आग्रह किया कि कर नियमों और RBI दिशानिर्देशों में स्पष्टता लाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे अंतर और गड़बड़ियों को रोका जा सके।

सरकारी और वित्तीय संस्थानों की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्रालय और रिज़र्व बैंक ने इस रिपोर्ट पर ध्यान देने और सुधारात्मक कदम उठाने का संकेत दिया है। बैंक और NBFCs को अब आंतरिक ऑडिट को और सख्त करने और टैक्स अनुपालन में सुधार लाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई से वित्तीय क्षेत्र की पारदर्शिता और कर प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सकता है।

यह रिपोर्ट बैंकों और NBFCs में वित्तीय अनुशासन और आंतरिक नियंत्रण की आवश्यकता पर एक स्पष्ट चेतावनी है। सिस्टमिक गड़बड़ियों और अनुपालन की कमी को समय रहते दूर करना ही वित्तीय स्थिरता और राजस्व संरक्षण की कुंजी है।

हमसे जुड़ें

Share This Article