राजस्थान में 2026 में 12 जुलाई तक ₹387 करोड़ की साइबर ठगी दर्ज हुई, जिसमें जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।

साइबर ठगी की ‘फाइनेंशियल चेन’ पर पुलिस का वार, बैंक खाते किराये पर देने वाले 20 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

बूंदी (राजस्थान): साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। बूंदी जिले के नैनवां क्षेत्र में पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में कथित रूप से इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों के मूल खाताधारकों के खिलाफ अभियान चलाकर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी अपने बैंक खाते किराये पर देकर साइबर अपराधियों को ठगी की रकम जमा करने और आगे ट्रांसफर करने में मदद कर रहे थे।

यह कार्रवाई साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘साइबर शील्ड अभियान’ के तहत की गई। पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C-MHA) के समन्वय पोर्टल और प्रतिबंध पोर्टल पर चिन्हित संदिग्ध बैंक खातों तथा साइबर अपराध हॉटस्पॉट लोकेशन के आधार पर जांच शुरू की थी।

FutureCrime Summit 2026 Invites Serving Government Officers for Complimentary Participation at Bharat Mandapam

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनमें साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के बाद संदिग्ध लेन-देन सामने आए थे। पड़ताल में आरोप है कि कुछ खाताधारकों ने कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए थे।

म्यूल अकाउंट के जरिए होती है ठगी की रकम की आवाजाही

पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी अक्सर अपने नाम से बैंक खाते इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे आम लोगों को आसान कमाई, कमीशन या पार्ट टाइम काम का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।

ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इनका इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और जांच एजेंसियों से बचाने के लिए किया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले लोग भी अपराध की पूरी श्रृंखला का हिस्सा बन जाते हैं। केवल मुख्य ठग ही नहीं, बल्कि उनके लिए वित्तीय रास्ता तैयार करने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं।

संदिग्ध खातों और डिजिटल जानकारी से हुई पहचान

पुलिस ने I4C-MHA के समन्वय पोर्टल पर उपलब्ध साइबर अपराध शिकायतों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी का विश्लेषण किया। इसके बाद ऐसे खातों की पहचान की गई, जिनका संबंध ऑनलाइन ठगी की घटनाओं से जुड़ा पाया गया।

जांच में पुलिस ने संदिग्ध खाताधारकों की भूमिका, बैंक लेन-देन, संपर्क नेटवर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। इसके आधार पर अलग-अलग स्थानों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में चेतराम, खुशीराम, अंजनी कुमार, कृष्णकुमार, चेतराम, अंकित, पंकज, आदित्य उर्फ किट्टू, नरेंद्र, कालूलाल, राकेश, मनीष, अक्षय कुमार, विनोद कुमार, अंकुश, निरंजन, गजेंद्र, अंकित, अंकुश और मुकेश शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों ने बताया गंभीर खतरा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूल अकाउंट नेटवर्क साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। ठगी की रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों में भेजकर अपराधी जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल डिजिटल ट्रेल की जांच पर्याप्त नहीं होती, बल्कि बैंकिंग पैटर्न, वित्तीय लेन-देन और खाताधारकों की भूमिका की गहन जांच जरूरी होती है। बैंक खातों की उपलब्धता रोकना साइबर अपराध नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग जानकारी या अन्य बैंकिंग दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अब केवल ठगों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पूरी वित्तीय व्यवस्था को खत्म करना जरूरी है जिसके जरिए अपराधी ठगी की रकम को आगे बढ़ाते हैं। साइबर शील्ड अभियान इसी रणनीति के तहत म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रहा है।

हमसे जुड़ें

Share This Article