अमेरिकी बायोटेक कंपनी बायोजेन (Biogen) ने अपनी चर्चित अल्ज़ाइमर दवा Aduhelm से जुड़े निवेशक मुकदमे को समाप्त करने के लिए लगभग ₹162 करोड़ (18.9 मिलियन डॉलर) का भुगतान करने पर सहमति जताई है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा था जिनमें कहा गया था कि कंपनी ने दवा की व्यावसायिक तैयारियों, संभावित बाजार सफलता और सरकारी स्वास्थ्य बीमा कवरेज को लेकर निवेशकों के सामने भ्रामक तस्वीर पेश की थी।
यह प्रस्तावित समझौता अमेरिकी राज्य मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत में दाखिल किया गया है। यदि अदालत इसे मंजूरी दे देती है तो वर्ष 2022 से लंबित प्रतिभूति वर्ग कार्रवाई (सिक्योरिटीज क्लास एक्शन) मुकदमे का औपचारिक रूप से निपटारा हो जाएगा। यह मामला लंबे समय से निवेशकों, दवा उद्योग और वित्तीय बाजारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था।
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विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब Aduhelm को अल्ज़ाइमर रोग के उपचार के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से 2021 में त्वरित मंजूरी मिली थी। उस समय यह दवा बायोजेन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही थी और कंपनी को उम्मीद थी कि यह उसके लिए एक बड़ी राजस्व उत्पन्न करने वाली दवा साबित होगी। हालांकि मंजूरी के तुरंत बाद वैज्ञानिक समुदाय, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई कि क्या दवा वास्तव में मरीजों को पर्याप्त चिकित्सीय लाभ पहुंचाती है।
निवेशकों का आरोप था कि बायोजेन ने सार्वजनिक बयानों और निवेशकों के साथ संवाद के दौरान यह संकेत दिया कि FDA की मंजूरी मिलने के बाद सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम Medicare के तहत दवा की कवरेज लगभग स्वतः सुनिश्चित मानी जा रही है। इसके अलावा कंपनी ने यह भी कहा था कि उसने दवा की वार्षिक कीमत और भुगतान संरचना को लेकर विभिन्न भुगतानकर्ताओं तथा स्वास्थ्य योजनाओं से पर्याप्त चर्चा की थी।
मुकदमे में दावा किया गया कि इन बयानों ने निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि Aduhelm का व्यावसायिक भविष्य मजबूत है और इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी। लेकिन बाद में परिस्थितियां अपेक्षा के विपरीत रहीं। Medicare ने दवा के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए और कवरेज को सीमित कर दिया, जिससे इसकी बाजार स्वीकार्यता पर गंभीर असर पड़ा। परिणामस्वरूप दवा का उपयोग बहुत सीमित रह गया और बायोजेन को अंततः इसके व्यावसायीकरण की योजना वापस लेनी पड़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। शुरुआती चरण में संघीय न्यायाधीश ने मुकदमे को खारिज कर दिया था। हालांकि बाद में निवेशकों की ओर से प्रस्तुत अतिरिक्त सामग्री और एक संसदीय रिपोर्ट का हवाला दिए जाने के बाद मामला पुनर्जीवित हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई जारी रही और अंततः समझौते का रास्ता निकला।
बायोजेन ने समझौते पर सहमति जताने के बावजूद किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी या गलत आचरण को स्वीकार करने से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि वह आरोपों से असहमत है, लेकिन लंबे और महंगे मुकदमे से बचने तथा अनिश्चितता समाप्त करने के उद्देश्य से समझौते का निर्णय लिया गया है।
इस मामले में प्रमुख वादी ओक्लाहोमा फायरफाइटर्स पेंशन एंड रिटायरमेंट सिस्टम था, जिसने अन्य प्रभावित निवेशकों की ओर से कार्रवाई शुरू की थी। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, निवेशकों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील समझौता राशि का एक-तिहाई हिस्सा वकील शुल्क के रूप में तथा लगभग ₹13 करोड़ तक के मुकदमे संबंधी खर्चों की प्रतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं।
यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब मुकदमे का परीक्षण चरण शुरू होने में केवल कुछ सप्ताह शेष थे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दवा कंपनियों द्वारा निवेशकों को दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता और कॉर्पोरेट जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। साथ ही यह भी संदेश देता है कि किसी नई दवा की व्यावसायिक संभावनाओं को लेकर किए गए सार्वजनिक दावों की जांच अब पहले से कहीं अधिक सख्ती से की जा रही है।
