बिहार पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने वाले कथित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

साइबर ठगी की रकम क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार

Team The420
4 Min Read

पटना (बिहार): बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) ने साइबर ठगी से अर्जित रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने वाले कथित संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह साइबर अपराधियों से प्राप्त अवैध धनराशि को म्यूल बैंक खातों के माध्यम से एकत्र करता था और बाद में उसे डिजिटल करेंसी में परिवर्तित कर विदेश भेजने का काम करता था। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पटना के कंकड़बाग निवासी गौतम गंभीर, विवान सिंह और तनय सिंह तथा नालंदा जिले के हिलसा निवासी सुमित राज के रूप में हुई है। सीसीएसयू ने पटना साइबर थाने के सहयोग से कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को पकड़ा। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपी साइबर अपराध से जुड़े पैसों को छिपाने और उसे आगे भेजने के लिए बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे।

India’s Largest Cybercrime Conference Nears: FutureCrime Summit 2026 Set for 6–7 August at Bharat Mandapam

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह बैंक पासबुक, 13 एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, चार मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड, विभिन्न मुहरें और क्यूआर पेमेंट कोड बरामद किए हैं। जब्त किए गए डिजिटल और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और धन के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सके।

जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से अलग-अलग बैंकों में म्यूल बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को जमा कराने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम इन खातों में पहुंचने के बाद उसे कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था और फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी खातों या डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त बैंक खातों की जांच में देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े लेनदेन का पता चला है। प्रारंभिक जांच में इन खातों से जुड़े मामलों में 14.67 करोड़ रुपये से अधिक की कथित साइबर ठगी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने साइबर अपराधी जुड़े थे और रकम को किन माध्यमों से विदेश भेजा गया।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर म्यूल बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क का इस्तेमाल अवैध धन को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ऐसे मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल डेटा और क्रिप्टो वॉलेट गतिविधियों की फोरेंसिक जांच से धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या पुलिस के आरोप मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। अभियोजन पक्ष को अदालत में डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोप साबित करने होंगे। सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। जब्त बैंक खातों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के दौरान यदि अन्य आरोपी, साइबर अपराधी समूह या अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article